
जिला बालोद में हड़ताली कर्मचारियों ने अनोखे अंदाज में पोलाअ पर्व मनाकर विरोध दर्ज किया। महिला कर्मचारियों ने अपने हाथों में मेहंदी रचाई और उसमें “नियमितीकरण” व अन्य मांगें लिखीं। उनका कहना था कि मेहंदी की खुशबू से शायद “सोई हुई सरकार” जाग जाए।
जिला स्तर पर रहा खास आयोजन
बालोद मुख्यालय स्थित बस स्टैंड पर कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से पर्व मनाया। इस दौरान जिला अध्यक्ष खिलेश साहू, संरक्षक दिनेश खर्कवाल, उपाध्यक्ष प्रेम यादव, जिला सचिव यजेंद्र, पूर्व अध्यक्ष व संरक्षक रितेश साहू, सभी ब्लॉक अध्यक्ष सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।

महिला कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा – “आज पोला पर्व हमने हड़ताल स्थल पर मनाया है, कल तीज भी यहीं मनाएंगे। हमारी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।”
160 से अधिक ज्ञापन, फिर भी खामोश सरकार
कर्मचारी संघ ने बताया कि पिछले 20 महीनों में सरकार को 160 से ज्यादा ज्ञापन सौंपे गए, साथ ही सभी विधायकों, जिला अध्यक्षों और नेताओं से समर्थन पत्र भी लिया गया। बावजूद इसके सरकार ने अब तक कोई ठोस पहल नहीं की। कर्मचारियों का आरोप है कि जनमानस को हो रही असुविधा की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की है, जो संवाद से बच रही है।
स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमराईं
हड़ताल से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अव्यवस्था गहरा गई है। कई अस्पताल बंद होने की कगार पर हैं।
मरीजों को दवाइयाँ उपलब्ध नहीं
नवजात शिशु वार्ड और पोषण आहार केंद्र बंद
शुगर, ब्लड टेस्ट, ट्रूनाट, सीबीनाट टेस्ट ठप
नेत्र परीक्षण बाधित
स्कूल और आंगनबाड़ी स्वास्थ्य परीक्षण बंद
रूटीन टीकाकरण ठप
टीबी, मलेरिया, कुष्ठ जैसी बीमारियों के मरीज दवाओं से वंचित

आंदोलन और उग्र करने की चेतावनी
कर्मचारी संघ ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया तो आंदोलन और भी उग्र होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।




















