कार्यक्रम के दौरान महिला कमांडो के कार्यों और सफर पर आधारित 11 मिनट का वीडियो प्रोजेक्टर पर दिखाया गया, जिसमें 1990 से लेकर अब तक की उपलब्धियों और संघर्षों की झलक पेश की गई। इस वीडियो को देखकर वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने तालियों से महिला कमांडो के कार्यों की सराहना की।
संस्थान निदेशक डॉ. भास्कर नारायण ने कहा—”शमशाद बेगम के कार्य हमें यह सीख देते हैं कि सीमित संसाधनों के बावजूद इच्छाशक्ति और लगन से बड़ी सफलता पाई जा सकती है।”
गौरव का क्षण
16 अगस्त को बालोद लौटीं शमशाद बेगम ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा—”लखनऊ में तिरंगा फहराना मेरे लिए ही नहीं बल्कि पूरे महिला कमांडो परिवार के लिए सम्मान की बात है। जब वीडियो देखकर लोगों ने तालियां बजाईं, तो गर्व से सीना चौड़ा हो गया।”
समारोह में उन्हें तिरंगा गमछा, मोमेंटो और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही सेवानिवृत्त सैनिकों द्वारा गॉड ऑफ ऑनर भी प्रदान किया गया।

महिला कमांडो का सफर
वीडियो में बताया गया कि किस तरह 1990 में महिला मंडल और स्व-सहायता समूहों से शुरुआत कर महिलाओं को संगठित किया गया। इसके बाद मितानिनों का गठन हुआ और धीरे-धीरे महिला कमांडो का कारवां आगे बढ़ता गया। आज भी यह संगठन जिला प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर बिना किसी वेतन के निस्वार्थ भाव से सामाजिक सेवा और जागरूकता अभियान में योगदान दे रहा है। कलेक्टर दिव्या मिश्रा समय-समय पर इनके कार्यों की सराहना करती रही हैं।
इसलिए दिया गया सम्मान
सीएसआईआर-आईआईटीआर द्वारा भेजे गए आमंत्रण पत्र में उल्लेख किया गया कि शमशाद बेगम ने महिला सशक्तिकरण, बाल शिक्षा, महिला साक्षरता और उद्यमिता के क्षेत्र में पिछले 34 वर्षों से उल्लेखनीय योगदान दिया है। इन्हीं विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें 2012 में पद्मश्री सम्मान भी मिल चुका है।
शमशाद बेगम ने इस सम्मान और अवसर के लिए जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह सम्मान पूरे महिला कमांडो संगठन की निस्वार्थ सेवा को समर्पित है।
संस्थान का परिचय
सीएसआईआर-भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (IITR), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन कार्यरत है। इसका ध्येय बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करना है। यहां नई दवाओं और उत्पादों की जांच की जाती है ताकि मानव शरीर के लिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। सीएसआईआर के अध्यक्ष स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।




















