नई दिल्ली।विदेशी दबाव को दरकिनार कर मुक्त व्यापार समझौते में किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साहसिक फैसले को देशभर के किसानों ने ऐतिहासिक बताया। किसानों ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व की भी सराहना करते हुए कहा कि सरकार ने साबित कर दिया है— भारत का किसान न केवल अन्नदाता है, बल्कि राष्ट्र की आत्मा भी है।

नई दिल्ली के पूसा कैंपस स्थित सुब्रहमण्यम हॉल में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के किसान संगठनों के नेता और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। मंच पर कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक एम. एल. जाट सहित कई किसान नेताओं ने सरकार के फैसले का समर्थन किया।

भारतीय किसान चौधरी चरण सिंह संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी ने कहा, “प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है कि भारत किसी कीमत पर किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों से समझौता नहीं करेगा। यह घोषणा कृषि और ग्रामीण भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करने वाली है।”
छत्तीसगढ़ युवा प्रगतिशील किसान संघ के विरेंद्र लोहान ने अमेरिकी कंपनियों को कृषि और डेयरी सेक्टर में प्रवेश न देने के फैसले को “हर खेत और गांव में गूंजने वाला” बताया। उन्होंने कहा, “जब तक वर्तमान नेतृत्व है, कोई भी ताकत किसानों को गुलाम नहीं बना सकती।”

पंजाब के किरपा सिंह नत्थूवाला ने कहा, “अगर समझौता हो जाता तो किसान बर्बाद हो जाते। अब हमारी छाती गर्व से चौड़ी हो गई है।”
कुलदीप सिंह बाजिदपुर ने जोड़ा, “सरकार के कदमों से किसानों की जिंदगी में बदलाव आ रहा है। उम्मीद है, आगे और मजबूत फैसले होंगे।”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “किसानों की सेवा भगवान की पूजा से कम नहीं। नकली खाद और उर्वरक बनाने वालों के खिलाफ सख्त कानून लाया जाएगा।” उन्होंने प्रधानमंत्री के फैसले को राष्ट्रहित का प्रतीक बताते हुए सिंधु जल समझौता रद्द करने जैसे पुराने फैसलों का भी जिक्र किया।
किसानों और नेताओं का एक स्वर— “विदेशी दबाव चाहे जितना हो, भारत के किसानों के हित सर्वोपरि हैं।”




















