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6 साल के संघर्ष के बाद मिला इंसाफ, अवैध विवाह करने वाले पति को 3 साल की जेल

बालोद/राजहरा। देश का इतिहास गवाह है—जब-जब नारी की अस्मिता और संतान की सुरक्षा पर आंच आई है, वह दुर्गा और काली का रूप लेकर अन्याय के खिलाफ खड़ी हुई है। ऐसी ही कहानी है राजहरा की उस बहादुर बेटी की, जिसने छह साल के लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अपने शोषक पति को जेल भिजवाया।

इस महिला का विवाह कोंडागांव जिले के माकड़ी गांव में हुआ था। शादी के बाद पता चला कि पति का पहले से ही किसी अन्य महिला से अवैध संबंध था। विरोध करने पर वह लगातार मारपीट और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होती रही। उसे खाना तक नहीं दिया जाता था।

इसी प्रताड़ना के बीच उसने एक बच्ची को जन्म दिया, जो जन्म से ही कई गंभीर बीमारियों से ग्रस्त थी—दोनों आंखों से दृष्टिहीन, हृदय में दो छेद, तालु में छेद और अन्य जटिल स्वास्थ्य समस्याएं। बेटी की हालत देख पति और ससुराल वालों ने मां-बेटी को घर से निकाल दिया और पति ने आर्य समाज, रायपुर में दूसरी शादी कर ली।

न्याय की लड़ाई में महिला ने पहले थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन कार्रवाई न होने पर अधिवक्ता भेष कुमार साहू के माध्यम से अवैधानिक द्वितीय विवाह का परिवाद दायर किया। 6 वर्षों की लंबी सुनवाई के बाद, राजहरा के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी  राहुल शर्मा ने आरोपी पति को तीन साल के सश्रम कारावास और 2,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

निर्णय के बाद पीड़िता और उसके परिवार ने न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त किया। समाजसेवी संस्थाओं ने बच्ची के इलाज में मदद का भरोसा दिया और अधिवक्ता को बधाई दी।

कानूनी तथ्य: भारतीय कानून के अनुसार, विवाहिता पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरा विवाह करना दंडनीय अपराध है, जिसके तहत कारावास और जुर्माना दोनों का प्रावधान है।

 

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