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भारत अब AI की दुनिया में सिर्फ कदम नहीं रख रहा, बल्कि तेज़ी से दौड़ रहा है.. देसी डेटा और देसी सोच से ‘इंटेलिजेंट इंडिया’ की ओर

 

नई दिल्ली। भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दिशा में अपनी बड़ी रणनीति पेश कर दी है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में बताया कि यह रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न पर आधारित है—टेक्नोलॉजी को लोकतांत्रिक बनाना, भारत-केंद्रित चुनौतियों का समाधान करना और हर नागरिक के लिए आर्थिक व रोजगार के नए अवसर तैयार करना।

मजबूत बुनियाद पर खड़ा AI मिशन

भारत का टेक सेक्टर 280 अरब डॉलर से ज़्यादा का है, जिसमें 60 लाख से अधिक लोग काम कर रहे हैं। देश में 1.8 लाख स्टार्टअप हैं, और पिछले साल के 89% नए स्टार्टअप AI-संचालित थे।
गिटहब पर AI प्रोजेक्ट्स में योगदान के मामले में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है। यही बुनियाद 2024 में शुरू हुए IndiaAI मिशन को मजबूती देती है।

AIकोष: देसी डेटा का खज़ाना

AI की असली ताकत डेटा है और भारत ने इसे समझते हुए AIकोष प्लेटफॉर्म बनाया। इसमें 1,200 से ज्यादा भारत-विशिष्ट डेटासेट और 217 AI मॉडल मौजूद हैं। किसान कॉल सेंटर के सवाल-जवाब, राज्यों के भूवैज्ञानिक रिकॉर्ड, मेडिकल इमेजिंग डेटा, और बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मलयालम जैसी भाषाओं के टेक्स्ट-टू-स्पीच मॉडल—सब कुछ एक ही जगह उपलब्ध है।
6,000 से ज्यादा लोग यहां रजिस्टर्ड हैं और अब तक 13,000 से अधिक रिसोर्स डाउनलोड हो चुके हैं।

भाषिणी: भाषा की दीवार तोड़ने का मिशन

भारत की असली ताकत उसकी भाषाई विविधता है, लेकिन यही AI के लिए सबसे बड़ी चुनौती भी रही है।
भाषिणी मिशन इस बाधा को खत्म कर रहा है—22 भाषाओं, अलग-अलग बोलियों और लहजों को डेटासेट में शामिल करके। इससे AI न सिर्फ किताबों की भाषा, बल्कि आम लोगों की बोलचाल भी समझ सकेगा।

विज्ञान और स्वास्थ्य में AI की बढ़ती भूमिका

IIT, IISc और IIIT जैसे संस्थान भारत-विशिष्ट डेटा तैयार कर रहे हैं—54 भाषाओं में 16,000 घंटे का वाणी डेटासेट,मेडिकल इमेजिंग और पब्लिक हेल्थ के लिए MIDAS डेटासेट,TB, डायबिटीज़ और अन्य बीमारियों पर क्लिनिकल डेटा
ICMR का हेल्थ रिसर्च डेटा रिपॉजिटरी वैश्विक मानकों के अनुरूप है और शोध को नई गति दे रहा है।

चुनौतियां और अवसर एक साथ

भारत की AI यात्रा तेज़ है, लेकिन रास्ता आसान नहीं—
पांच प्रमुख चुनौतियां:

1. क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के लिए पर्याप्त डेटा जुटाना। 2. डेटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करना। 3. ग्रामीण इलाकों तक AI का लाभ पहुंचाना। 4. तेज़ी से बदलती तकनीक के साथ मानव कौशल को अपडेट रखना। 5. AI एल्गोरिद्म में पूर्वाग्रह से बचना।

दूसरी ओर, पांच बड़े अवसर भी हैं—

1. कृषि में AI आधारित स्मार्ट समाधान। 2. स्वास्थ्य सेवाओं में तेज़ और सटीक निदान। 3. शिक्षा में व्यक्तिगत लर्निंग टूल्स। 4. छोटे व्यवसायों के लिए AI से ई-कॉमर्स और मार्केटिंग सपोर्ट।5. वैश्विक AI रिसर्च में भारत का नेतृत्व।

भविष्य की दिशा

विज्ञान के लिए AI” और “इंडिया AI ओपन स्टैक” जैसी पहलें भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की ओर ले जा रही हैं। यह रणनीति न केवल भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रख सकती है, बल्कि गांव-गांव में AI के जरिए जीवन बदल सकती है।

भारत की AI रणनीति महज़ टेक्नोलॉजी का शोपीस नहीं है। यह एक ऐसा रोडमैप है, जिसमें डेटा भी देसी है, ज़रूरतें भी और समाधान भी। अगर यह प्लान सही दिशा में चला, तो आने वाले दशक में भारत ‘डिजिटल इंडिया’ से आगे बढ़कर ‘इंटेलिजेंट इंडिया’ बन सकता है।

 

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