निरीक्षण के दौरान कलेक्टर मिश्रा ने मरीजों से सीधे बात कर यह समझने की कोशिश की कि इलाज कैसा मिल रहा है, डॉक्टर-स्टाफ का व्यवहार कैसा है और ज़रूरी सुविधाएं समय पर मिल रही हैं या नहीं। उन्होंने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को मरीजों से आत्मीयता से पेश आने और समय पर इलाज देने की हिदायत दी।

अस्पताल के पंजीयन कक्ष, ड्रेसिंग रूम, जनरल वार्ड, औषधि भंडारण कक्ष और एक्स-रे रूम तक पहुंचकर कलेक्टर ने हर हिस्से की बारीकी से जांच की। जनरल वार्ड में भर्ती मरीज खम्हन और रेंदसिंह से मिलकर उन्होंने इलाज और देखभाल के बारे में सीधी बातचीत की।
दवाओं की वैधता पर खास ध्यान
औषधि स्टोर में रखी दवाओं की एक्सपायरी डेट जांची गई। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि एक्सपायर दवाएं तुरंत हटाई जाएं और स्टोर की नियमित जांच की जाए। साथ ही उन्होंने बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए मौसमी बीमारियों से निपटने वाली दवाएं पर्याप्त मात्रा में स्टॉक में रखने के निर्देश भी दिए।
भोजन की गुणवत्ता पर भी नज़र
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर अस्पताल की रसोई तक पहुंचीं और मरीजों के लिए बन रहे भोजन को देखा। उन्होंने कहा कि जो मेन्यू तय है, उसी के मुताबिक पौष्टिक और साफ-सुथरा खाना मरीजों को मिले, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।
टीबी मरीजों की संख्या और इलाज की ली जानकारी
कलेक्टर ने ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर से टीबी मरीजों की कुल संख्या और उनके इलाज की व्यवस्था के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने एसडीएम आर.के. सोनकर को अस्पताल की निगरानी नियमित रूप से करने और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को मुख्यालय में ही रहने के निर्देश दिए।
इस मौके पर जिला पंचायत सीईओ सुनील चंद्रवंशी, एसडीएम रामकुमार सोनकर, तहसीलदार हनुमंत श्याम समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।




















