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“बंधन की डोर, सुरक्षा की ओर”: रक्षाबंधन पर बालोद पुलिस की बहनों से भावनात्मक अपील

बालोद।रक्षाबंधन सिर्फ राखी बाँधने और मिठाइयों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, अब ज़रूरत है एक ऐसे तोहफे की जो जीवनभर भाई की सुरक्षा सुनिश्चित करे। इसी सोच के साथ बालोद पुलिस ने जिले की बहनों से एक अनोखी और मार्मिक अपील की है—इस रक्षाबंधन पर भाई को हेलमेट भेंट करें और उससे नशा से दूर रहने का संकल्प लें।

सड़क सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर जारी इस विशेष संदेश में पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल ने कहा कि “रक्षाबंधन, भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा का पर्व है। आज के दौर में यह सुरक्षा सिर्फ भावनात्मक नहीं, व्यावहारिक भी होनी चाहिए। इसलिए बहनें अपने भाई को हेलमेट उपहार में देकर उसकी जिंदगी को बचाने का संकल्प लें।”

राखी के साथ सुरक्षा का उपहार दें”

बालोद पुलिस ने एक भावनात्मक पोस्टर जारी कर बहनों से अपील की है कि वे केवल रक्षा-सूत्र न बांधें, बल्कि हेलमेट को ‘सुरक्षा सूत्र’ मानते हुए भाई को गिफ्ट करें। यह न सिर्फ एक प्रतीकात्मक तोहफा होगा, बल्कि यह हर दिन उसकी रक्षा में मददगार साबित हो सकता है।

“रक्षा का अर्थ बदले, व्यवहार में उतरे”

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि“राखी केवल वचनों का आदान-प्रदान नहीं, अब ज़रूरी है कि हम व्यावहारिक रूप से भी अपने भाई की सुरक्षा सुनिश्चित करें।”

उन्होंने यह भी जोड़ते हुए कहा कि “ज्यादातर सड़क हादसों में युवा हेलमेट नहीं पहनते, जिससे उनकी जान चली जाती है। ऐसे में बहनें यह छोटा-सा कदम उठाकर भाई की ज़िंदगी को बड़ा सुरक्षा कवच दे सकती हैं।”

यातायात नियमों की भी याद दिलाई

रक्षाबंधन के इस विशेष अभियान के साथ-साथ बालोद पुलिस ने सड़क सुरक्षा के 7 खास नियम भी दोहराए:

1. दो पहिया वाहन पर हेलमेट जरूर पहनें।

2. चार पहिया वाहन चलाते समय सीट बेल्ट लगाएँ।

3. ड्राइविंग करते समय मोबाइल का प्रयोग न करें।

4. गति सीमा का पालन करें।

5. यातायात संकेतों और पुलिस निर्देशों का पालन करें।

6. सड़क पार करते समय सतर्क रहें, खासकर बुजुर्ग व बच्चों के साथ।

7. नशे में वाहन चलाने से बचें।

हेलमेट बाँधिए, जीवन संवारिए”

बालोद पुलिस का यह अनूठा संदेश केवल एक जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन का प्रारंभ है, जिसमें राखी की डोर को सुरक्षा की ओर मोड़ने का प्रयास है। बहनों से की गई यह भावनात्मक अपील समाज में एक नई सोच को जन्म दे सकती है—जहां रक्षा केवल रस्म नहीं, जिम्मेदारी भी बन जाए।

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