बैठक में कलेक्टर ने साफ कहा – “शिक्षा सिर्फ स्कूल की जिम्मेदारी नहीं, इसमें शिक्षक, पालक और खुद बच्चे – तीनों की बराबर भागीदारी जरूरी है। मिलकर ही हम बेहतर परिणाम दे सकते हैं।”

उन्होंने पालकों से अपील की कि वे सिर्फ रिपोर्ट कार्ड तक सीमित न रहें, बल्कि बच्चों की पढ़ाई में रोज़ाना दिलचस्पी लें। बैठक में कक्षा 10वीं और 12वीं के पिछले परीक्षा परिणामों की समीक्षा की गई और आने वाले दिनों में सुधार के लिए रणनीति पर चर्चा हुई।
कलेक्टर मिश्रा ने बताया कि बच्चों को तीन श्रेणियों में बांटकर उनके लिए मेंटर्स नियुक्त किए गए हैं।
80% से ऊपर वालों को और बेहतर बनाने,
50-80% वालों को प्रोत्साहित करने,
और 50% से कम वालों को खास मदद देने का प्लान तैयार किया गया है।
उन्होंने प्राचार्य को निर्देश दिया कि टॉपर्स के लिए वे खुद मेंटर बनें और टीचर्स से विषयवार पढ़ाई पर फोकस करने को कहा।
बैठक में बच्चों से संवाद करते हुए कलेक्टर ने पूछा कि पढ़ाई में क्या अच्छा लग रहा है, और कहां दिक्कतें आ रही हैं। इस दौरान उन्होंने अटल टिकरिंग लैब, स्टाफ रूम, शौचालय समेत स्कूल के अन्य हिस्सों का निरीक्षण भी किया। बच्चों द्वारा बनाए गए मॉडलों को देखकर उन्होंने तारीफ की और लैब को और बेहतर बनाने के सुझाव दिए।

इस पूरे दौरे में उनके साथ जिला पंचायत सीईओ सुनील चंद्रवंशी, एसडीएम शिवनाथ बघेल, बीईओ हिमांशु मिश्रा सहित कई अधिकारी और शिक्षक-पालक मौजूद थे।
कलेक्टर दिव्या मिश्रा की इस पहल से यह साफ झलकता है कि वे सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए जमीनी स्तर पर खुद उतर रही हैं। जब प्रशासन, शिक्षक और पालक एक मंच पर होंगे, तो परिणाम भी जरूर शानदार होंगे।




















