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हॉफ बिजली बिल योजना में बदलाव से बढ़ी सियासी गर्मी, कांग्रेस ने बताया ‘सौगात में कटौती’

रायपुर।राज्य सरकार की ‘हॉफ बिजली बिल योजना’ में हुए बदलाव ने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। अब तक 400 यूनिट तक के उपभोग पर मिल रही छूट की बजाय, अब 100 यूनिट तक की खपत पर ही 50 फीसदी छूट दी जाएगी। यानी, अब छूट की सीमा घटी है, लेकिन सरकार का दावा है कि इसका असर जरूरतमंद उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के करीब 45 लाख घरेलू उपभोक्ताओं में से 31 लाख (यानी लगभग 70%) की मासिक खपत 100 यूनिट से कम है। इनमें 15 लाख बीपीएल परिवार भी शामिल हैं, जिन्हें पहले की ही तरह योजना का लाभ मिलता रहेगा। राज्य सरकार का कहना है कि यह संशोधन “बिना असर के बदलाव” है, जिससे लाभार्थियों को राहत मिलती रहेगी।

हालांकि, विपक्ष को यह बात हजम नहीं हो रही। कांग्रेस नेताओं ने सोशल मीडिया पर सरकार को घेरते हुए इसे गरीबों के साथ धोखा करार दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि “चुनाव के वक्त मुफ्त बिजली का वादा किया गया था, अब धीरे-धीरे उस वादे की बिजली ही काट दी जा रही है।”

इस बीच, सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को तेजी से आगे बढ़ाने का ऐलान किया है। इस योजना के तहत रूफटॉप सोलर प्लांट पर ₹1.08 लाख तक की सब्सिडी दी जा रही है, जिससे उपभोक्ता खुद की बिजली बना सकते हैं। सरकार का दावा है कि सोलर प्लांट से न सिर्फ उपभोक्ता बिजली बिल से मुक्त होंगे, बल्कि अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई भी कर सकेंगे।

विशेषज्ञों की मानें तो सरकार का यह कदम दूरगामी दृष्टि से फायदेमंद हो सकता है, लेकिन अभी इसे आम जनता तक पहुंचाने और भरोसा दिलाने की चुनौती बनी हुई है।

 अब सवाल ये है कि क्या जनता ‘हॉफ बिजली बिल’ से आगे बढ़कर ‘मुफ्त बिजली उत्पादन’ की ओर बढ़ेगी या फिर बदली हुई योजना के खिलाफ विरोध की चिंगारी और भड़केगी?

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