बालोद। जिले में खनिज न्यास मद से बनी योजनाओं के दुरुपयोग और प्रशासनिक उदासीनता का एक और उदाहरण सामने आया है। झलमला गांव के शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में लगभग दस वर्ष पहले 20 लाख रुपये की लागत से बना चिल्ड्रन म्यूजिकल पार्क आज खंडहर में तब्दील हो चुका है। न संचालन की जिम्मेदारी तय हुई, न देखरेख का प्रबंध — नतीजा ये कि लाखों के उपकरण या तो चोरी हो चुके हैं या कबाड़ में बदलते जा रहे हैं।
विज्ञान और गणित के प्रति रुचि जगाने बनी थी योजना
वर्ष 2016-17 में जिला खनिज न्यास निधि से 10 लाख रुपये की लागत से इस पार्क का निर्माण कराया गया था। बच्चों में खेल-खेल में विज्ञान और गणित के प्रति रूचि जगाने के उद्देश्य से तैयार यह पार्क बालोद जिले का पहला और एकमात्र म्यूजिकल पार्क माना गया था। बाद में इसके रखरखाव और विस्तार के लिए अतिरिक्त 10 लाख रुपये की स्वीकृति भी दी गई। इस तरह कुल 20 लाख की यह परियोजना आज तक बगैर उपयोग के पड़ी है।

न हैंडओवर, न संचालन
स्थानीय स्कूल प्रशासन को अब तक इस पार्क की जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है, न ही किसी अन्य संस्था को इसके संचालन की जवाबदारी दी गई। निर्माण के नौ साल बाद भी यह पार्क केवल एक निष्क्रिय संरचना बनकर रह गया है। उपकरणों की नियमित देखभाल नहीं होने से पार्क की मूल भावना ही समाप्त हो गई है।
स्कूल स्टाफ और विद्यार्थी भी परेशान
पार्क के साथ ही खेल मैदान में विद्यार्थियों और स्टाफ के लिए लाखों की लागत से शौचालय का निर्माण भी किया गया था, लेकिन चिल्ड्रन पार्क अधूरा और अव्यवस्थित होने के चलते यह शौचालय भी उपयोग में नहीं आ सका। मैदान न तो खेलने लायक रह गया और न ही पार्क की उपयोगिता बची है। स्कूल के विद्यार्थियों और शिक्षकों को रोजमर्रा की सुविधाओं के अभाव में दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।

जवाबदेही तय हो, पुनर्संचालन की मांग
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का कहना है कि यदि समय रहते पार्क का संचालन सुनिश्चित किया जाता और देखरेख की जिम्मेदारी तय होती, तो यह आज जिले के बच्चों के लिए एक प्रेरणादायक केंद्र बन सकता था। अब सवाल उठता है कि आखिर 20 लाख की राशि कहां और कैसे खर्च हुई, और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?




















