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सीएम के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला, भाजपा मंडल अध्यक्ष ने दर्ज कराई शिकायत

बालोद/गुण्डरदेही।राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में भाजपा मंडल अध्यक्ष द्वारा पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। यह टिप्पणी कथित रूप से वीरनारायण साहू नामक व्यक्ति द्वारा व्हाट्सएप स्टेटस के माध्यम से की गई थी, जिसे लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में आक्रोश है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, युवराज मारकण्डेय, जो कि वर्तमान में भाजपा मंडल अध्यक्ष (गुण्डरदेही) हैं, ने थाना रनचिरई में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि वीरनारायण साहू, निवासी ग्राम सकरौंद (पोस्ट राहुद, थाना रनचिरई, जिला बालोद), ने 28 जुलाई की शाम 7:41 बजे अपने मोबाइल नंबर 6260691756 से मुख्यमंत्री और भाजपा संगठन के विरुद्ध आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग करते हुए व्हाट्सएप स्टेटस लगाया था।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यह स्टेटस उन्होंने 29 जुलाई को दोपहर लगभग 1 बजे पढ़ा, जिससे न केवल उन्हें बल्कि भाजपा कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों को भी ठेस पहुंची है। इस पोस्ट में मुख्यमंत्री को अपमानजनक रूप में संबोधित किया गया, साथ ही भाजपा को लेकर भी निंदात्मक टिप्पणियां की गईं।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि पोस्ट में “बे आदिवासी” जैसे शब्दों का प्रयोग कर सामाजिक सौहार्द्र को भी ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई है।

इस घटना को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में रोष व्याप्त है और उन्होंने संबंधित व्यक्ति पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी है।

इस पूरे प्रकरण में व्हाट्सएप स्टेटस की प्रति भी साक्ष्य के तौर पर पुलिस को सौंपी गई है। पुलिस ने आईटी एक्ट एवं भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है।

क्या कहा पुलिस ने 

थाना रनचिरई के प्रभारी ने पुष्टि करते हुए बताया कि शिकायत प्राप्त होने पर प्रथम दृष्टया मामला संज्ञान में लिया गया और संबंधित धाराओं में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की गई है।

 

पृष्ठभूमि में सोशल मीडिया की जिम्मेदारी पर उठते सवाल
यह घटना एक बार फिर सोशल मीडिया पर अनुशासन और जिम्मेदारी की बहस को सामने लाती है। राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर आलोचना की स्वतंत्रता हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन उसकी मर्यादा लांघना और सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का उपयोग न सिर्फ कानूनी बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी आपत्तिजनक माना जाता है।

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