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बड़ी खबर:- उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दिया इस्तीफा, स्वास्थ्य कारणों का हवाला

नई दिल्ली। भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार, 21 जुलाई 2025 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया कि यह निर्णय उन्होंने चिकित्सकीय सलाह और स्वास्थ्य कारणों को प्राथमिकता देने के चलते लिया है। उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है।

जगदीप धनखड़ का कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ था, लेकिन बीते कुछ समय से उनकी सार्वजनिक उपस्थिति सीमित हो गई थी। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के चलते वे कई अहम आयोजनों और बैठकों से दूरी बना रहे थे। आज अचानक आए उनके इस्तीफे ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।

उपराष्ट्रपति ने अपने पत्र में संविधान की धारा 67(a) के तहत त्यागपत्र दिया है, जिसके अनुसार कोई भी उपराष्ट्रपति स्वेच्छा से राष्ट्रपति को लिखित पत्र देकर इस्तीफा दे सकता है।

साढ़े तीन वर्षों का गरिमामय कार्यकाल

जगदीप धनखड़ ने 11 अगस्त 2022 को भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। इसके पहले वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे और राजनीतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने जनता दल के साथ की थी। लंबे समय तक वकालत करने के बाद उन्होंने भारतीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। उपराष्ट्रपति के रूप में उन्होंने राज्यसभा के सभापति के तौर पर कार्य करते हुए कई महत्वपूर्ण विधायी प्रक्रियाओं का संचालन किया।

धनखड़ अपने बेबाक वक्तव्यों और सख्त संसदीय अनुशासन के लिए जाने जाते रहे। राज्यसभा में उनकी अध्यक्षता के दौरान कई बार सत्ता और विपक्ष के बीच तीखे संवाद भी हुए, लेकिन उन्होंने सदन की गरिमा बनाए रखने की पूरी कोशिश की।

आगे की प्रक्रिया

उपराष्ट्रपति पद के रिक्त होते ही नई नियुक्ति की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी। निर्वाचन आयोग उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की तारीखों की घोषणा करेगा। तब तक राज्यसभा के कार्य संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे समय में, जब संसद का मानसून सत्र चल रहा है और देश में कई बड़े विधायी निर्णय लंबित हैं, उपराष्ट्रपति का इस्तीफा एक असामान्य स्थिति पैदा करता है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्यसभा की कार्यवाही और संवैधानिक प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी।

संवैधानिक पद से गरिमापूर्वक विदाई

धनखड़ का इस्तीफा एक ऐसे समय आया है जब देश आगामी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनावों की संभावनाओं को लेकर भी सजग है। उनका यह निर्णय दर्शाता है कि वे व्यक्तिगत स्वास्थ्य को सर्वोपरि मानते हैं और पद की गरिमा को बनाए रखते हुए स्वयं को पीछे कर लिया है।

राजनीतिक दलों, गणमान्य नागरिकों और विभिन्न राज्यों के राज्यपालों ने उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया है और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।

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