बालोद, बालोद जिले में 20 जुलाई को प्रस्तावित वृहद वृक्षारोपण अभियान अब सिर्फ सरकारी आयोजन भर नहीं रहा। यह अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। दो लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य लिए इस अभियान में अब शासन-प्रशासन के साथ आम जनता, सामाजिक संगठन, स्कूल-कॉलेज और स्वयंसेवी संस्थाएं भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभा रही हैं।
इस अभियान को लेकर जिस तरह का उत्साह लोगों में देखा जा रहा है, वह निश्चित रूप से हरियाली के प्रति जनजागृति का परिचायक है। जगह-जगह लोग इस मुहिम का प्रचार-प्रसार खुद कर रहे हैं — और सबसे अहम बात यह कि यह आंदोलन अब दिलों से जुड़ता नजर आ रहा है।

मेहंदी पर लिखा ‘एक पेड़ माँ के नाम’ — सोशल मीडिया पर गूंज
जिले के पर्यावरण प्रेमी भोज कुमार साहू ने अनोखे अंदाज़ में इस अभियान को समर्थन दिया है। उन्होंने अपने हाथों पर मेहंदी से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ और ‘20 जुलाई को आओ, बालोद में हरियाली बिखेरें’ का संदेश लिखवाकर सोशल मीडिया के ज़रिए लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया है।
उनका यह प्रयास लोगों को काफी पसंद आ रहा है और यह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

भोज कुमार साहू, पर्यावरण प्रेमी, ने कहा “अगर देश का हर नागरिक एक पेड़ लगाए और उसे अपनी माँ के नाम समर्पित करे, तो कल्पना कीजिए – करोड़ों पेड़ हर साल लगेंगे। यही बदलाव लाएगा। यही हरियाली बचाएगा।”

‘ग्रीन कमांडो’ बच्चों के साथ ले रहे हैं मोर्चा
बालोद के ही ग्रीन कमांडो के नाम से पहचाने जाने वाले वीरेंद्र सिंह स्कूली बच्चों के साथ गाँव-गाँव घूमकर लोगों से अपील कर रहे हैं — “एक पेड़ माँ के नाम जरूर लगाइए।” उनके साथ स्थानीय शिक्षक और युवा भी इस जागरूकता में शामिल हैं। लोग पेड़ लगाने के लाभ जानकर खुद से आगे बढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।

कलेक्टर की पहल बनी प्रेरणा, गाँव-गाँव में दिखने लगा असर
इस पूरे अभियान की नींव रखी है बालोद की कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने, जिन्होंने 20 जुलाई को जिलेभर में एक साथ वृक्षारोपण के आदेश जारी किए। उनकी पहल के बाद अब गाँव-गाँव में लोगों की सोच और सक्रियता बदली है। यह पहल अब प्रशासनिक आदेश से आगे निकलकर जनसरोकार का हिस्सा बन गई है।

यदि ऐसा ही जन-जागरूकता देशभर में फैले, तो अगले कुछ वर्षों में भारत की तस्वीर बदल सकती है
पर्यावरणीय असंतुलन, अनियमित बारिश, गर्मी में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियाँ हमारे सामने हैं — लेकिन यदि हर जिले में बालोद जैसा जागरूकता अभियान शुरू हो जाए, तो देश को हरियाली की नई दिशा मिल सकती है।
एक पेड़ माँ के नाम केवल नारा नहीं, बल्कि एक ऐसा भावनात्मक सूत्र है जो प्रकृति से पुनः संबंध जोड़ता है।




















