रायपुर।छत्तीसगढ़ ने नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। राज्य के 11 जिलों को भारत सरकार से ‘कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस’ (CBBFS) मिलने की दिशा में बड़ी कामयाबी मिली है। इन जिलों में मोतियाबिंद के चलते दृष्टिहीन लोगों की पहचान कर सफल ऑपरेशन किए गए, जिससे हजारों लोगों की रोशनी लौट आई।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत पिछले डेढ़ साल में 1.80 लाख से ज्यादा मोतियाबिंद ऑपरेशन किए गए हैं। इनमें अकेले अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच 1.45 लाख और अप्रैल से जून 2025 तक 27 हजार से अधिक ऑपरेशन शामिल हैं।
कौन-कौन से जिले हुए मोतियाबिंद मुक्त?
अब तक जिन 11 जिलों का दावा भारत सरकार को भेजा गया है, वे हैं: रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बालोद, बलौदाबाजार, धमतरी, कबीरधाम, खैरागढ़, रायगढ़, कोरबा और बस्तर।
वहीं कांकेर और बेमेतरा जिलों का सत्यापन फिलहाल चल रहा है।
नेत्रदान को लेकर बढ़ी जागरूकता
सरकार की लगातार कोशिशों और जागरूकता अभियानों का असर नजर आ रहा है। पिछले डेढ़ साल में 351 लोगों ने नेत्रदान किया है, जिससे कई लोगों को नई रोशनी मिली। राज्य में कॉर्नियल दृष्टिहीनता को खत्म करने के लिए नेत्र प्रत्यारोपण केंद्र और नेत्र बैंक भी सक्रिय हैं।
ग्लॉकोमा और रेटिना जैसे जटिल रोगों पर भी फोकस
स्वास्थ्य विभाग केवल मोतियाबिंद ही नहीं, बल्कि ग्लॉकोमा, रेटिना, डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसे गंभीर नेत्र रोगों की भी स्क्रीनिंग और इलाज कर रहा है। राज्यभर के स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त जांच और इलाज की सुविधा दी जा रही है। 40 वर्ष से ऊपर के लोगों को हर 6 माह में नेत्र परीक्षण कराने की सलाह भी दी जा रही है।
आंकड़े जो बताते हैं बदलाव की तस्वीर
1.80 लाख से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन
351 नेत्रदान
1 लाख से ज्यादा अन्य नेत्र रोगियों का इलाज
43 सरकारी अस्पतालों में नेत्र ऑपरेशन की सुविधा
सरकार की प्रतिबद्धता
राज्य सरकार की कोशिश है कि हर जरूरतमंद व्यक्ति को सुलभ, आधुनिक और मुफ्त नेत्र चिकित्सा सेवा मिले। मोबाइल स्क्रीनिंग कैंप, आधुनिक उपकरण, और तेजी से सर्जरी की सुविधा ने लाखों लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाया है।




















