छात्रों का कहना है कि वे सुबह 8:30 बजे ही परीक्षा केंद्र पहुंच गए थे, लेकिन परीक्षा केंद्र प्रभारी ने यूनिफॉर्म का हवाला देते हुए उन्हें परीक्षा में बैठने नहीं दिया। छात्र परेशान होकर करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित अपने घर लौटे और हल्का गीला यूनिफॉर्म पहनकर पुनः परीक्षा केंद्र पहुंचे, लेकिन इस बार देरी का हवाला देकर फिर परीक्षा में बैठने से मना कर दिया गया।

इस घटना के बाद छात्रों ने परिजनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी। मामला सामने आते ही स्थानीय प्रतिनिधि सक्रिय हुए और पहले जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय और फिर बालोद कलेक्टरेट पहुंचकर कलेक्टर को पूरे मामले से अवगत कराया। प्रतिनिधियों ने दोषी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

क्या कहा छात्रों और जनप्रतिनिधियों ने?
कुणाल दास, छात्र ने कहा “हम सुबह से ही परीक्षा देने पहुंचे थे, लेकिन यूनिफॉर्म भीग गई थी। दूसरे पैंट पहनने पर हमें परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया। जब वापस यूनिफॉर्म पहनकर आए, तो देर से आने का हवाला देकर फिर मना कर दिया गया।”
नीलिमा श्याम, जिला पंचायत सदस्य, गुजरा ने कहा “यह छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है। इतनी सख्ती किस लिए? प्रशासन को जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।”
संजय बैंस, पूर्व जनपद सदस्य, कुसुमकसा ने कहा “यूनिफॉर्म के नाम पर बच्चों को परीक्षा से वंचित करना अमानवीय है। हम इसे लेकर कलेक्टर से शिकायत कर चुके हैं और न्याय की मांग करते हैं।”
प्रशासन से अपील
मामले को लेकर शिक्षा विभाग और प्रशासन से यह उम्मीद की जा रही है कि वह मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर उचित निर्णय लेगा। साथ ही इस प्रकार की कठोरता और लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।




















