रायपुर/भिलाई। छत्तीसगढ़ की राजनीति शुक्रवार सुबह उस समय गर्मा गई जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भिलाई स्थित निवास पर दबिश दी। सुबह करीब 6 बजे ईडी की टीम अचानक उनके घर पहुंची, जिसके बाद सियासी गलियारों में हलचल मच गई।
ईडी की यह कार्रवाई किस मामले में हुई है, इसका आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन यह कदम राज्य विधानसभा सत्र के अंतिम दिन उठाया गया है, जो अपने आप में कई सवाल खड़े कर रहा है। इसी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने एक्स (पूर्ववर्ती ट्विटर) पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा: “ED आ गई।
आज विधानसभा सत्र का अंतिम दिन है।
अडानी के लिए तमनार में काटे जा रहे पेड़ों का मुद्दा आज उठना था।
भिलाई निवास में ‘साहेब’ ने ED भेज दी है।”
पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि वे इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध मान रहे हैं। गौरतलब है कि बघेल ने बीते कुछ महीनों में लगातार केंद्र सरकार और अदानी समूह के बीच कथित संबंधों को लेकर सवाल उठाए हैं। हाल ही में उन्होंने तमनार में जंगलों की कटाई को लेकर विधानसभा में यह मुद्दा उठाने की बात कही थी।
क्या है तमनार का मुद्दा?
रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में प्रस्तावित बिजली परियोजना और कोयला खनन कार्य को लेकर पर्यावरणीय व सामाजिक विरोध के स्वर लंबे समय से उठते रहे हैं। भूपेश बघेल ने यह आरोप लगाया कि इस परियोजना के लिए स्थानीय आदिवासियों की सहमति के बिना जंगलों की कटाई की जा रही है और इसका सीधा फायदा अदानी समूह को पहुंचाया जा रहा है।
कांग्रेस ने केंद्र पर साधा निशाना
ईडी की कार्रवाई के तुरंत बाद कांग्रेस नेताओं ने इसे बदले की भावना से प्रेरित बताया। पहले भी हुई ईडी की कार्यवाही के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा था “जब-जब बीजेपी को जवाब देना मुश्किल होता है, तब-तब ईडी को आगे कर दिया जाता है। ये छत्तीसगढ़ की जनभावनाओं का अपमान है।”
भाजपा की प्रतिक्रिया
वहीं भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को नकारते हुए कहा कि “अगर किसी ने भ्रष्टाचार किया है, तो जांच एजेंसियों को अपना काम करने देना चाहिए। इसे राजनीति से जोड़ना गलत है।”
सत्र का अंतिम दिन, विपक्ष की रणनीति पर असर
आज विधानसभा सत्र का अंतिम दिन है और कांग्रेस ने पहले ही पर्यावरण व आदिवासी अधिकारों के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रखी थी। अब ईडी की कार्रवाई से यह तय है कि सदन में भी इसकी गूंज सुनाई देगी और विपक्ष इसे राजनीतिक दखल के रूप में पेश करेगा।
ईडी की यह छापेमारी सिर्फ एक कानूनी कार्रवाई है या इसके पीछे गहरी राजनीतिक चालें बिछाई गई हैं — यह आने वाले समय में साफ होगा। फिलहाल, भूपेश बघेल के सीधे “साहेब” को निशाना बनाते पोस्ट और अडानी प्रकरण की पृष्ठभूमि इस मामले को साधारण जांच से कहीं अधिक राजनीतिक रंग दे रहे हैं।




















