प्रदर्शन के पश्चात मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन अपर कलेक्टर प्राची ठाकुर को सौंपा गया। आंदोलनकारियों की मांग है कि केंद्र सरकार की ‘मोदी गारंटी’ के अनुरूप सुविधाएं प्रदेश में भी तत्काल प्रभाव से लागू की जाएं तथा वर्षों से लंबित मांगों का शीघ्र निराकरण किया जाए।
फेडरेशन की प्रमुख मांगें:
प्रशासकीय सेवकों एवं पेंशनरों को केंद्र के समान महंगाई भत्ता (DA) एवं महंगाई राहत (DR) दिया जाए।
लंबित डीए एरियर की राशि कर्मचारियों के खाते में समायोजित की जाए।
चार स्तरीय वेतनमान लागू किया जाए।
केंद्र के समान 33 की जगह 25 वर्ष सेवा पर पूर्ण पेंशन की सुविधा मिले।
नि:शर्त अनुकंपा नियुक्ति की व्यवस्था हो।
संविदा, दैनिक वेतनभोगी, अतिथि शिक्षक जैसे अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए।
सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर की जाए।
पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
पंचायत सचिवों को शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
अर्जित अवकाश सीमा 240 दिन से बढ़ाकर 300 दिन की जाए।
प्रदेशभर में कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए।

इस धरना प्रदर्शन में बालोद जिले के स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मचारी भी शामिल रहे जिन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।
प्रमुख पदाधिकारियों की उपस्थिति:
इस दौरान जिला संयोजक लोकेश कुमार, महासचिव घनश्याम पुरी, पेंशनर फोरम संयोजक मधुकांत यदु, राज्य कर्मचारी संघ जिलाध्यक्ष वीरेंद्र देशलहरे, छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन अध्यक्ष राधेश्याम साहू, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ जिलाध्यक्ष परशुराम धनेन्द्र, छ.ग. प्रदेश शिक्षक संघ के तामेश्वर कौशल, पेंशनर्स संघ अध्यक्ष आर.एम. चावड़ा, चेतन यादव, गजेंद्र पुरी गोस्वामी, राजेंद्र कुमार साहू, लोमन राणा, कृष्णा पुरी गोस्वामी, गिरीश देवांगन, मनसुखदास साहू, भूधर दास जोशी, मनीष साहू, आस्था चंद्राकर, यूरेका साहू, राधा साहू समेत कई संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।




















