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भारत के अंतरिक्ष हीरो की घर वापसी: शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक वापसी पर देश ने किया गर्व का इज़हार

नई दिल्ली | भारत के अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की आज धरती पर वापसी के साथ न सिर्फ एक मिशन पूरा हुआ, बल्कि भारत ने अंतरिक्ष जगत में अपनी बढ़ती ताकत का भी संदेश दुनिया को दे दिया। एक्सिओम-4 मिशन के तहत 18 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर बिताने के बाद शुक्ला स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल ‘ग्रेस’ में सुरक्षित लौट आए। वे भारतीय समयानुसार दोपहर 3 बजे के बाद सैन डिएगो तट के पास प्रशांत महासागर में लैंड हुए।

केंद्रीय अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे “दुनिया के लिए गर्व और भारत के लिए गौरव का पल” बताया। उन्होंने कहा कि “भारत मां का एक वीर सपूत वापस लौट आया है” और अब भारत ने अंतरिक्ष की दुनिया में अपनी स्थायी जगह बना ली है।

🌍 अंतरिक्ष से लौटा ‘विश्व बंधु’

मंत्री डॉ. सिंह ने शुक्ला को “विश्व बंधु” कहकर संबोधित किया और कहा कि यह मिशन वसुधैव कुटुम्बकम की भावना का प्रतीक है – जिसमें भारत ने वैज्ञानिक सहयोग और भाईचारे की नई मिसाल पेश की है। एक्सिओम-4 मिशन में शुक्ला के साथ अमेरिका, पोलैंड और हंगरी के अंतरिक्ष यात्री भी शामिल थे।

 ऐसा मिशन जो पहले कभी नहीं हुआ

मंत्री ने इस मिशन को “ऐसा प्रयोग जो पहले कभी नहीं हुआ” बताते हुए कहा कि यह भारत की वैज्ञानिक सोच और तकनीकी क्षमता के नए युग की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि इस मिशन की सफलता मानवता को दीर्घकालिक लाभ दे सकती है और यह भारत की युवा पीढ़ी को साइंस और स्पेस में करियर के लिए प्रेरित करेगा।

🇮🇳 ISRO से बातचीत, फिर भारत वापसी

डॉ. सिंह ने बताया कि चारों अंतरिक्ष यात्री 23 जुलाई तक क्वारंटाइन में रहेंगे, इसके बाद 24 जुलाई से ISRO के साथ तकनीकी चर्चा शुरू होगी। एक्सिओम और नासा के साथ संयुक्त डीब्रीफिंग के बाद शुभांशु शुक्ला के 17 अगस्त तक भारत लौटने की संभावना है।

 गगनयान की तैयारी और भारत की वैश्विक भूमिका

भारत की इस ऐतिहासिक भागीदारी ने गगनयान जैसे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की जमीन और मजबूत की है। एक्सिओम-4 में भारत की मौजूदगी यह साबित करती है कि अब भारत सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष साझेदारी का अहम भागीदार बन चुका है।

इसरो के लिए यह एक संकेत है कि भारत अब ‘अंतरिक्ष की होड़’ में दौड़ने नहीं, बल्कि दिशा तय करने आया है।

यह वापसी सिर्फ अंतरिक्ष से लौटने की नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास, वैज्ञानिक सोच और वैश्विक जिम्मेदारी की वापसी है।

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