बालोद | गुरुर तहसील के ग्राम सांगली खार के किसानों के लिए हर बरसात आफत लेकर आती है। ग्राम सनौद-गुरुर मार्ग पर स्थित सांगली और सनौद खार के बीच की जमीन में वर्षों से लगातार जलभराव की समस्या बनी हुई है, जिससे क्षेत्र के सैकड़ों किसान फसल उत्पादन से वंचित हो रहे हैं। पीडब्ल्यूडी विभाग की लापरवाही और अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था इस संकट की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है।

खेत नहीं, तालाब बन गए हैं सांगली और सनौद के बीच बनी डामर सड़क के दोनों ओर आसपास के गांवों का बरसाती पानी एकत्र होता है। उचित ढलान और पानी निकासी के अभाव में यह पानी सीधे सांगली खार की ओर बहता है और खेतों में लंबे समय तक जमा हो जाता है। किसानों का कहना है कि इस स्थायी जलभराव के कारण वे धान की बोवनी और अन्य कृषि कार्य नहीं कर पा रहे हैं।
ह्यूम पाइप जाम, सिस्टम फेल
स्थानीय कृषकों का आरोप है कि पीडब्ल्यूडी विभाग ने वर्षों पहले जलनिकासी के लिए जो ह्यूम पाइप लगाए थे, वे अब जाम हो चुके हैं। पानी सड़क के ऊपर से बहकर खेतों में घुसता है और वहां ठहर जाता है। खेत अब उपजाऊ भूमि नहीं, बल्कि अस्थायी तालाब में तब्दील हो गए हैं।

हर साल शिकायत, फिर भी नहीं सुनवाई ग्रामीणों द्वारा इस समस्या को लेकर लगातार विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क किया गया, लिखित और मौखिक निवेदन भी किए गए। पिछले सप्ताह जनदर्शन में भी इस समस्या को उठाया गया, जिसके बाद पीडब्ल्यूडी विभाग के कुछ अधिकारी मौके पर पहुंचे और ‘निकासी की औपचारिक व्यवस्था’ की। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इससे कोई व्यावहारिक समाधान नहीं हुआ।
प्रशासन से उम्मीद कायम, PWD पर रोष
ग्रामीणों ने एक बार फिर 15 जुलाई को जनदर्शन में अपनी समस्या दोहराई और जिला प्रशासन से उचित कदम उठाने की गुहार लगाई। किसानों का स्पष्ट कहना है कि जिला प्रशासन की संवेदनशीलता पर उन्हें भरोसा है, लेकिन बार-बार अवगत कराने के बावजूद पीडब्ल्यूडी विभाग की अनदेखी निराशाजनक है।

जीवन का एकमात्र सहारा – अब संकट में
खेती इन किसानों की आजीविका का एकमात्र साधन है। जलभराव की वजह से सिर्फ फसल नहीं, उनकी आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है। सूरज पटेल, घनश्याम सिंह, भारत लाल, भुनेश्वर भाई समेत कई किसान बताते हैं कि हर साल यह समस्या दोहराई जाती है, लेकिन हल नहीं मिलता।
बारिश आई, राहत नहीं, चिंता लाई। हर साल खेतों में बोआई की जगह, पानी का जमाव होता है। और हर बार समाधान की जगह “औपचारिक कार्यवाही”। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन की सक्रियता से क्या पीडब्ल्यूडी विभाग की नींद टूटेगी और गांव को स्थायी राहत मिलेगी?




















