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टटेंगा-भरदा के ग्रामीणों की दो टूक चेतावनी – 21 जुलाई को चक्काजाम, अगर नहीं मानी गईं मांगे

बालोद। गुंडरदेही विधानसभा क्षेत्र के टटेंगा भरदा गांव के ग्रामीण एक बार फिर आंदोलन के मूड में हैं। वर्षों से लंबित दो मूलभूत मांगों—टटेंगा मोड़ से भरदा तक सड़क निर्माण और टटेंगा को स्वतंत्र पंचायत घोषित करने—को लेकर ग्रामीणों ने बालोद कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन को चेतावनी दी है। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि 21 जुलाई तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो चक्काजाम होगा।

जनसुनवाई नहीं, तो जनाक्रोश तय

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि दोनों मांगें वर्षों से अटकी हैं। जर्जर सड़क के चलते बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है, आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। बावजूद इसके, न तो संधारण हुआ और न ही नई सड़क बनी।

दूसरी ओर, टटेंगा पंचायत में 1700 से अधिक की आबादी के बावजूद स्वतंत्र पंचायत की मांग अब तक अनसुनी है, जिससे स्थानीय प्रशासनिक कामों में हमेशा दिक्कत आती है।

चुनाव का बहिष्कार और आंदोलन की चेतावनी

गांववालों ने पहले भी विरोध जताया है। पंचायत चुनाव 2024 का सामूहिक बहिष्कार कर चुके हैं। इसके बाद भी कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। 25 फरवरी को भी ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय में शिकायत की थी, लेकिन अब तक नतीजा सिफर रहा। अब ग्रामीणों का सब्र टूटता दिख रहा है।

ग्रामीणों का कहना – “अबकी बार आर-पार”

ग्रामीणों ने चेताया है कि यदि इस बार भी प्रशासन ने अनदेखी की तो 21 जुलाई को बड़े पैमाने पर चक्काजाम और उग्र आंदोलन होगा। ग्रामीण संगठनों का कहना है कि यह सिर्फ सड़क और पंचायत का मुद्दा नहीं, आवाज और अस्तित्व की लड़ाई है।

राजेश साहू – पूर्व जनपद सदस्य, जेवरतला ने कहा “गांव की सड़क और स्वतंत्र पंचायत की मांग वर्षों से की जा रही है। प्रशासन सुनता ही नहीं। अब आंदोलन ही एकमात्र रास्ता बचा है।”

कालीचरण सिन्हा ग्रामीण, टटेंगा ने कहा”हमारे बच्चे स्कूल जाते वक्त गिरते हैं, घायल होते हैं। इतनी बड़ी आबादी होते हुए भी हमें पंचायत नहीं दी गई। ये अन्याय है। अब हम पीछे नहीं हटेंगे।”

जनसरोकार क्यों?

यह सिर्फ एक गांव की बात नहीं, बल्कि उन सैकड़ों गांवों की भी है जहां आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी बुनियादी सुविधाएं सपना बनी हुई हैं। जब सड़क, स्कूल और पंचायत जैसी बुनियादी जरूरतें भी ‘मांगनी’ पड़ें तो सवाल व्यवस्था पर उठना तय है।

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