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ग्राम पंचायत घोटिया में भ्रष्टाचार का खुलासा: बिना GST बिल के लाखों का भुगतान, जांच के घेरे में सरपंच-सचिव

बालोद/दल्लीराजहरा। ग्राम पंचायत घोटिया में सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और दस्तावेजों की हेराफेरी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। वर्तमान सरपंच ममता मंडावी, सचिव शैलेश वैद्य, पूर्व सचिव पिल्लै सिंह दुग्गा, कमल संग्रामे और कुशल सिंह बघेल के खिलाफ अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), दल्लीराजहरा द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इन सभी को 18 जुलाई 2025 तक संतोषजनक जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

इस मामले में गंभीर आरोप हैं कि लाखों रुपए का भुगतान बिना वैध GST बिलों के किया गया और दूसरे फर्मों के बिल लगाकर अन्य व्यक्तियों को राशि दी गई। जांच में सामने आया है कि पंचायत में बिलों की वैधता की पुष्टि किए बिना ही भुगतान कर दिए गए और संबंधित आडिटर की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।

2018 में हुए कार्य में गंभीर अनियमितताएं

शिकायतकर्ता कुलवंत प्रकाश वैष्णव ने बताया कि वर्ष 2018 में हाई स्कूल घोटिया में आहाता निर्माण कार्य में अनियमितता हुई थी। यह कार्य तत्कालीन पंच और वर्तमान उपसरपंच भोज कुमार साहू के माध्यम से कराया गया था। आरोप है कि इस कार्य में “नरेंद्र किराना स्टोर्स” के नाम से बिना GST नंबर का 320 रुपये का बिल लगाया गया, जिसकी तारीख में भी छेड़छाड़ की गई।

इतना ही नहीं, एक अन्य बिल क्रमांक 129, दिनांक 06-07-2018 को 6060 रुपये का बिना GST नंबर का बिल पेश कर दिया गया। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि इसके बाद मजदूरों के मस्टर रोल की आड़ में तत्कालीन सचिव कमल सिंह संग्रामे द्वारा भोज कुमार साहू को 50,000 रुपये का भुगतान कर दिया गया, जिसे किसी प्रकार की आपत्ति आडिटर द्वारा नहीं दर्शाई गई।

जांच बनी दिखावा, अधिकारी बने मूकदर्शक

शिकायतकर्ता के अनुसार जब इस मामले में पंचायत के सिर्फ 67 बिंदुओं पर जांच करवाई गई, तब अधिकारियों की पूरी फौज — एडिशनल सीईओ से लेकर इंजीनियर तक — मौके पर पहुंची। लेकिन कार्य प्रस्ताव और भुगतान दस्तावेजों को दिखाने से सभी बचते रहे। जब ग्रामीण आपत्ति जताते थे, तब कहा जाता था कि “इसका उल्लेख अभिमत में कर दिया जाएगा” और जांच आगे बढ़ा दी जाती थी।

फर्जी भुगतान के बदले चुप्पी?

मामले में शिकायतकर्ता कुलवंत वैष्णव ने बताया कि एक दिलचस्प मोड़ यह है कि भोज कुमार साहू, जो कभी सरपंच ममता मंडावी के खिलाफ आरटीआई लगाकर अविश्वास प्रस्ताव और बर्खास्तगी की मांग करते थे, अब उनके सबसे करीबी सहयोगी बन चुके हैं। आरोप है कि जब से उन्हें फर्जी भुगतान मिलने लगा, तब से उन्होंने सरपंच के खिलाफ बोलना बंद कर दिया है और अब पंचायत के कई निर्णयों में मनमानी करते नजर आते हैं — जैसे कि बोर खनन या अन्य विकास कार्यों में हस्तक्षेप।

ग्राम पंचायत घोटिया में यह मामला सिर्फ एक पंचायत की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे पंचायत तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। जहां एक ओर शिकायतकर्ता जवाब और कार्य प्रस्ताव मांगते रहे, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी एक-दूसरे की ओर इशारा कर मामले को टालते रहे।

अब देखना यह है कि 18 जुलाई को पंचायती व्यवस्था में व्याप्त इस भ्रष्टाचार पर क्या कार्रवाई होती है, और क्या जांच सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह जाएगी या फिर दोषियों पर ठोस कार्रवाई की जाएगी।

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