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कोचिंग सेंटर अब टैलेंट के दुश्मन? उपराष्ट्रपति ने क्यों कहा ‘ब्लैक होल’ बन चुके हैं ये संस्थान”

कोचिंग नहीं, ‘पोचिंग सेंटर’: उपराष्ट्रपति ने बताई शिक्षा की सबसे बड़ी बीमारी

कोटा। देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कोचिंग सेंटरों की हकीकत पर दो टूक हमला करते हुए उन्हें “पोचिंग सेंटर” करार दिया और कहा कि ये संस्थान अब प्रतिभाओं को निगलने वाले “ब्लैक होल” बन गए हैं। राजस्थान के कोटा स्थित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) के दीक्षांत समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि कोचिंग सेंटर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रवाह के खिलाफ हैं और शिक्षा को असेंबली लाइन की तरह बना रहे हैं, जो युवा सोच को कुंद कर रहा है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि कोचिंग सेंटर उत्तम ग्रेड और मानकीकृत अंकों की ऐसी अंधी दौड़ चला रहे हैं, जिसमें छात्रों की जिज्ञासा दम तोड़ रही है। उन्होंने चेताया कि यह सिर्फ परीक्षा पास कराने की व्यवस्था नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक रूप से खतरनाक प्रवृत्ति है, जो हमारी शिक्षा व्यवस्था को दूषित कर रही है।

क्या कहा उपराष्ट्रपति ने:

कोचिंग सेंटर अब ‘पोचिंग सेंटर’ बन गए हैं, जहां छात्रों की मौलिक सोच और जिज्ञासा को निगला जा रहा है।”

हम शिक्षा को असेंबली लाइन की तरह नहीं देख सकते। यह हमारी सभ्यता के मूल्यों के खिलाफ है।”

रटने की संस्कृति ने युवाओं को जीवंत मस्तिष्कों से मशीन बना दिया है। इसमें ना समझ है, ना रचनात्मकता।”

धनखड़ ने कोचिंग इंडस्ट्री द्वारा विज्ञापन और होर्डिंग पर खर्च किए जा रहे भारी-भरकम पैसे पर भी चिंता जताई और इसे छात्रों के माता-पिता की मेहनत की कमाई का दुरुपयोग बताया। उन्होंने कहा कि कोचिंग सेंटरों को चाहिए कि वे अपने बुनियादी ढांचे को कौशल विकास केंद्रों में बदलें और समाज के प्रति जिम्मेदार बनें।

डिजिटल संप्रभुता की चेतावनी

उपराष्ट्रपति ने एल्गोरिद्म आधारित वैश्विक नियंत्रण पर भी जोर दिया और कहा कि भविष्य की लड़ाइयां अब सेना से नहीं, बल्कि तकनीक और डेटा से लड़ी जाएंगी। उन्होंने डिजिटल आत्मनिर्भरता को राष्ट्रवाद का नया रूप बताते हुए कहा कि भारत को तकनीकी नेतृत्व में अग्रणी बनना होगा।

क्लास रूम से क्लाउड तक सोच बदलने की जरूरत

धनखड़ ने कहा कि युवाओं को सिर्फ ग्रेड नहीं, बल्कि ज्ञान के आधार पर परखा जाना चाहिए। ग्रामीण भारत में काम न करने वाला स्मार्ट ऐप अधूरा है, और क्षेत्रीय भाषाओं को न समझने वाला एआई मॉडल असमानता का प्रतीक है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए भारतीय समाधान बनाएं और दुनिया को दिशा दें।

उपराष्ट्रपति की यह चेतावनी न केवल कोचिंग इंडस्ट्री के लिए एक करारा संदेश है, बल्कि समाज के हर उस हिस्से के लिए भी, जो शिक्षा को सिर्फ मार्कशीट तक सीमित मान बैठा है। यह वक्त है कि हम रटने और अंक गिनने वाली व्यवस्था से आगे बढ़ें और जिज्ञासा, कौशल और नवाचार पर आधारित शिक्षा मॉडल अपनाएं – क्योंकि आने वाला भारत सिर्फ डिग्रीधारियों का नहीं, विचारशील इनोवेटर्स का होगा।

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