मुख्यमंत्री ने वैष्णव ब्राह्मण समाज के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि यह समाज न सिर्फ धर्म और संस्कृति के क्षेत्र में, बल्कि शासन-प्रशासन से लेकर जनसेवा तक हर स्तर पर अपनी छाप छोड़ता आया है। उन्होंने राजनांदगांव की ब्राह्मण रियासत का ज़िक्र करते हुए कहा कि यहां के राजाओं ने दानशीलता की जो मिसाल कायम की है, वह देशभर में अनूठी है।

CM साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम की ननिहाल भूमि है और इसी भाव से ‘रामलला दर्शन योजना’ शुरू की गई है, जिसके तहत अब तक 22 हजार श्रद्धालु अयोध्या जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि ‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना’ भी फिर से शुरू कर दी गई है, जिसमें 60 साल से ऊपर के बुजुर्ग किसी भी तीर्थ स्थल की यात्रा कर सकते हैं। दिव्यांगजन, विधवाएं और परित्यक्ताओं को इसमें आयु छूट दी गई है।
उन्होंने देश को 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प का ज़िक्र करते हुए कहा कि उसी दिशा में विकसित छत्तीसगढ़ का सपना भी साकार करना है, और इसमें वैष्णव ब्राह्मण समाज की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव राजपरिवार ने उच्च शिक्षा, रेलवे और उद्योगों के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने महंत दिग्विजय दास और घासीदास जी के योगदानों का ज़िक्र करते हुए कहा कि समाज का दूरदर्शी नेतृत्व हमेशा प्रेरणास्पद रहा है।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने समाज को सनातन धर्म का ध्वजवाहक बताया और राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता की सराहना की।
इस मौके पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, समाज के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष पी.एल. बैरागी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लाल जे.के. वैष्णव, प्रदेश अध्यक्ष राकेश दास वैष्णव सहित देशभर से कई प्रमुख चेहरे मौजूद रहे।




















