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बालोद रेल्वे फाटक फिर बना जाम का कारण, मैन्युअल खुलवाना पड़ा बैरियर, लोग हुए परेशान ….फ्लाईओवर की मांग फिर हुई बुलंद, ट्रैफिक और एंबुलेंस सेवा लगातार प्रभावित

 

बालोद। बालोद से राजनांदगांव मार्ग पर स्थित रेलवे फाटक एक बार फिर आम जनता के लिए सिरदर्द साबित हुआ। शनिवार दोपहर करीब 3:00 बजे का वक्त था, जब रेलवे फाटक बंद हुआ और मालगाड़ी के गुजरने के बाद भी घंटों तक लोगों को इंतजार करना पड़ा। वजह – बैरियर में तकनीकी खराबी।

लोगों ने जब देखा कि एक तरफ का बैरियर नहीं खुल रहा है, तो बेचैनी और गुस्सा साफ देखा गया। दोपहिया, चारपहिया वाहन चालकों की लंबी कतार लग गई। कई लोग फाटक को पार करने की कोशिश में आगे बढ़ने लगे, लेकिन जोखिम भांपकर रुक गए। अंततः ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी राजकुमार साहू ने केबिन से उतरकर मैन्युअली बैरियर खोला, तब जाकर राहत की सांस ली गई।

 ये कोई पहली बार नहीं है…

इस रेलवे फाटक से रोज़ हजारों वाहन गुजरते हैं। राजनांदगांव-बालोद मार्ग होने की वजह से ट्रैफिक का दबाव जबरदस्त रहता है। लेकिन रेलवे फाटक की व्यवस्था सालों से पुराने ढर्रे पर ही चल रही है। तकनीकी गड़बड़ियों के चलते अक्सर ऐसा होता है कि लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं।

 एंबुलेंस भी हो चुकी हैं प्रभावित

इस मार्ग से कई बार इमरजेंसी सेवाएं – जैसे एंबुलेंस – भी बाधित हो चुकी हैं। मरीजों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका, जिससे इलाज में देर हुई और संकट और गहरा गया।

 कब बनेगा फ्लाईओवर?

स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि वर्षों से इस जगह फ्लाईओवर की मांग कर रहे हैं। सर्वे भी हो चुका है, स्वीकृति की बातें भी आईं लेकिन धरातल पर काम आज तक शुरू नहीं हुआ।
अब एक बार फिर फाटक में खराबी और लोगों की परेशानी ने फ्लाईओवर की मांग को तेज कर दिया है।

फाटक बंद के दौरान फंसे एक स्थानीय नागरिक रूपेश साहू ने बताया “ये फाटक रोज का सिरदर्द है। कोई इमरजेंसी हो या स्कूल का समय – हर बार जाम में फंसे रहते हैं। ये समस्या हर किसी को झेलनी पड़ती है।” तो एक दुकानदार ने कहा”हम कई बार मांग कर चुके हैं फ्लाईओवर की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं। जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होता, तब तक शायद ध्यान नहीं दिया जाएगा।”

 

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