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सेमरिया नाला पुल बना ग्रामीणों की मुसीबत, दर्जनों  गांवों की राह हुई मुश्किल

बालोद। बालोद जिले के ग्राम बोरी से होकर बहने वाला सेमरिया नाला इन दिनों 20 से ज्यादा गांवों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। हाल ही में आई भारी बारिश के चलते नाला उफान पर आ गया, जिससे पुराने जर्जर पुलिया की एप्रोच रोड बह गई। चार दिन बीतने के बावजूद भी यह मार्ग आज तक आवागमन योग्य नहीं बन सका है।

इस स्थिति के चलते ग्रामीणों, किसानों, स्कूली बच्चों और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को 15 से 20 किमी लंबा चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है। जिन परिवारों की रोजी-रोटी शहर या अन्य गांवों में मजदूरी या सेवा से जुड़ी है, उनके लिए यह दूरी आर्थिक व मानसिक बोझ बन चुकी है।


तीन साल पहले स्वीकृत, लेकिन काम अधर में

जानकारी के मुताबिक, सेमरिया नाला पर उच्च स्तरीय पुल निर्माण के लिए तीन वर्ष पूर्व 3.10 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई थी। लेकिन सरकार बदलने के बाद टेंडर निरस्त कर दिया गया और काम ठप हो गया। हालांकि, हाल ही में फिर से नवीन निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और बारिश के बाद काम शुरू होने की उम्मीद है।

लेकिन सवाल यह है कि बारिश हर साल आती है, लोग हर साल इसी तरह परेशान होते हैं। जब तक स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक क्या ऐसी दिक्कतें ग्रामीणों की नियति बन जाएंगी?

जर्जर पुल, हर साल बहता संधारण

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल 8-10 वर्षों से जर्जर हालत में है। हर साल बारिश से पहले केवल अस्थायी मरम्मत का नाटक होता है और पहली ही बारिश में वह बह जाता है। प्रशासन, जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारियों को सालों से ज्ञापन दिए जा रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस है।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पुल की स्थिति ऐसी हो गई है कि अब पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है। ऐसे में हर साल दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन शायद प्रशासन को किसी बड़ी घटना का इंतजार है।

 शिक्षा भी प्रभावित, बच्चों की पढ़ाई खतरे में

नाला पर पुल न होने के कारण कई स्कूल-कॉलेज छात्र लंबी दूरी तय करने में असमर्थ हैं और कुछ छात्र तो विद्यालय जाना ही बंद कर चुके हैं। यही हाल खेतों में जाने वाले किसानों और मरीजों का भी है, जिनके लिए यह मार्ग जीवन रेखा के समान है।

अंत में में सवाल…

पुल निर्माण के लिए स्वीकृति मिलना अच्छी बात है, लेकिन “जब तक काम शुरू नहीं होता, तब तक क्या लोगों की समस्या यूं ही बनी रहेगी?”
क्या प्रशासन इस अंतरिम समय के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर सकता?

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