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डौंडी में फूटा आक्रोश: तालाब सूखे, सड़कें टूटीं, मवेशी बेघर… थक हारकर अब सड़कों पर उतरे व्यापारी और किसान

बालोद डौंडी। नगर पंचायत डौंडी में प्रशासन की सुस्त कार्यशैली और उपेक्षित मूलभूत समस्याओं से त्रस्त नगरवासियों का गुस्सा आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा। व्यापारी संघ और किसान संगठन के नेतृत्व में शुक्रवार को नगर पंचायत कार्यालय का छह घंटे तक घेराव किया गया। यह सिर्फ एक आंदोलन नहीं, बल्कि वर्षों की अनसुनी समस्याओं पर जनता का असहायता से उपजा आक्रोश था।

पानी, सफाई, सड़क और सुरक्षा जैसे जनजीवन से जुड़े मुद्दों पर अब तक प्रशासन की निष्क्रियता ने लोगों को सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया। व्यापारी संघ द्वारा उठाए गए छह सूत्रीय मांगों में जर्जर व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स की मरम्मत, बेसहारा मवेशियों की समस्या, नालियों की नियमित सफाई, महिला प्रसाधन और सड़क लाइट जैसी बेहद ज़रूरी सुविधाएं शामिल थीं।

नगर के व्यापारिक परिसर की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि हर बारिश के साथ छतें टपकने लगती हैं। दुकानदार जान जोखिम में डालकर व्यापार कर रहे हैं। उधर, मुख्य सड़क से बाजार तक बेसहारा मवेशियों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन पंचायत प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।

20 जून को सीएमओ संतोष देवांगन द्वारा समस्याओं को एक सप्ताह में हल करने का आश्वासन दिया गया था, मगर 20 दिन बाद भी कोई हल नहीं निकलने पर व्यापारियों ने इसे छलावा मानकर आंदोलन का निर्णय लिया।

तहसीलदार देवेंद्र नेताम, सीएसपी डॉ. चित्रा वर्मा, डीएसपी बोनिफस एक्का और थाना प्रभारी उमा ठाकुर सहित भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। वहीं नगर अध्यक्ष मोहन्तिन चौरका और उपाध्यक्ष संजीव मानकर ने जनता को भरोसा दिलाया कि नगर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने की दिशा में ठोस कदम जल्द उठाए जाएंगे।

अंततः व्यापारी संघ को एडीएम चंद्रकांत कौशिक से बातचीत के लिए जोड़ा गया और सभी मांगों की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई का आश्वासन मिला। किसान संघ ने भी अपनी अलग मांगों का ज्ञापन सौंपते हुए इस आंदोलन को समर्थन दिया।

यह आंदोलन न सिर्फ प्रशासन को जगाने की कोशिश है, बल्कि यह दर्शाता है कि जब जनप्रतिनिधि और नागरिक साथ हों तो व्यवस्था को जवाबदेह बनाया जा सकता है।

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