
सेमरिया नाला बना संकट, पुल बहा – गांवों का टूटा संपर्क
बालोद के बोरी गांव स्थित सेमरिया नाला पर बना कच्चा पुल तेज बहाव में बह गया है। इससे दर्जन भर से अधिक गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। ग्रामीणों को अब कई किलोमीटर लंबा रास्ता तय कर मुख्यालय पहुंचना पड़ रहा है।
ग्रामीण सालों से यहां पक्का पुल बनाने की मांग कर रहे थे। 2023 में पूर्ववर्ती सरकार ने पुल निर्माण को स्वीकृति दी थी, लेकिन नई सरकार के आने के बाद आबंटन रोक दिया गया। हाल ही में फिर से शासन ने स्वीकृति तो दे दी है, लेकिन इस मानसून में ग्रामीणों को भारी मुसीबतों का सामना करना तय है।

रेलवे कॉलोनी में तबाही का मंजर – घरों में घुसा पानी, किचन तक डूबे
बालोद नगर के रेलवे क्वार्टर्स की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। यहां बारिश का पानी घरों में घुस चुका है। कुछ घरों में तो रसोई तक पानी भर गया है, जिससे महिलाओं को खाना बनाने में मुश्किल हो रही है।
नालियों की सफाई न होने और उनमें पेड़-पौधे उग आने के चलते जल निकासी पूरी तरह ठप हो चुकी है। कॉलोनी में कीड़े-मकोड़ों और यहां तक कि सांप निकलने की भी घटनाएं सामने आई हैं, जिससे लोग डर के साए में जी रहे हैं। न रेलवे प्रशासन और न ही नगरपालिका इस ओर कोई ध्यान दे रही है।

बस स्टैंड बना तालाब, दुकानदार परेशान, यात्री बेहाल
बालोद शहर का बस स्टैंड बारिश के बाद झील में तब्दील हो गया है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक परेशान हैं। दुकानदारों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासनिक दावों की पोल खुल चुकी है।

बीस गांवों का टूटा संपर्क, ग्रामीणों को अलर्ट
देवरीबंगला, खैरा, गहिरा नवागांव, कोसमी, परसाडीह, साल्हे बाजार, मनकी सहित कई क्षेत्रों में नाले उफान पर हैं। मार्री नाले में दो फीट तक पानी बह रहा है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पार कर रहे हैं। पुलिस और प्रशासन की टीम लगातार पेट्रोलिंग कर रही है और नदी-नालों के पास न जाने की हिदायत दी गई है।
देवरी शराब दुकान भी डूबी – दुकान बंद, शौकीन मायूस
देवरीबंगला क्षेत्र में छापा नाला की बाढ़ ने शराब की दुकान तक को नहीं बख्शा। शराब दुकान में पानी घुसने के बाद प्रशासन ने दोपहर 12 बजे दुकान को बंद करा दिया। नतीजा – शराब की तलाश में आए शौकीन लोग मायूस होकर लौट गए।

किसानों की चिंता बढ़ी – खेत जलमग्न,फसलें खराब होने का डर
पिछले कुछ दिनो से।जहां किसान बारिश नही होने पर फसल को लेकर चिंतित थे वही इस बीच लगातार बारिश से नदी-नालों के किनारे स्थित खेत पूरी तरह से डूब चुके हैं। जिससे किसानों की खरीफ फसलें खराब होने की आशंका हैं। किसान चिंतित हैं कि यदि जल स्तर नहीं घटा तो फसल का भारी नुकसान तय है।
बालोद जिले की बारिश अब सिर्फ मौसम की बात नहीं रही, यह जनजीवन के लिए एक बड़ा संकट बन चुकी है। प्रशासनिक तैयारी की कमी, बुनियादी ढांचे की कमी और प्राकृतिक आपदा – तीनों ने मिलकर जिले को मुसीबत में डाल दिया है। सवाल यह है कि कब तक ग्रामीण इसी हालात में बारिश की मार झेलते रहेंगे?




















