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निष्क्रिय राजनीतिक दलों पर निर्वाचन आयोग की बड़ी कार्रवाई छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा को नोटिस, मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू

 बालोद,भारत निर्वाचन आयोग ने देशभर के निष्क्रिय राजनीतिक दलों की पहचान कर उन्हें सूची से बाहर करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से पंजीकृत छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा (दल्लीराजहरा) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। यह कार्यवाही उन सैकड़ों राजनीतिक दलों के विरुद्ध शुरू की गई राष्ट्रव्यापी कार्रवाई का हिस्सा है, जो न तो चुनाव लड़ते हैं, न ही किसी राजनीतिक गतिविधि में सक्रिय दिखते हैं।

राष्ट्रीय दृष्टिकोण: निष्क्रियता पर आयोग का शिकंजा

भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत पंजीकृत किसी भी राजनीतिक दल को आयोग के समक्ष सक्रियता बनाए रखना अनिवार्य है। छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा वर्ष 2019 से अब तक किसी लोकसभा, विधानसभा या उपचुनाव में भाग नहीं ले पाया है। आयोग के रिकॉर्ड में न तो पार्टी का सक्रिय कार्यालय पता उपलब्ध है और न ही चुनावी भागीदारी का कोई प्रमाण।

इस स्थिति में आयोग ने धारा 29ए और संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस दल को पंजीकृत सूची से हटाने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, अंतिम निर्णय से पहले दल को 11 जुलाई 2025 तक जवाब देने का अवसर दिया गया है।

प्रशासनिक पहलू: बालोद प्रशासन ने की प्रक्रिया प्रारंभ

जिले के अपर कलेक्टर एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी  चंद्रकांत कौशिक ने बताया कि निर्वाचन आयोग के निर्देश पर पार्टी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। यदि नियत तिथि तक जवाब नहीं मिलता है, तो यह समझा जाएगा कि दल के पास कहने के लिए कुछ नहीं है और आयोग उचित निर्णय पारित करेगा।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नोटिस के साथ दल को आवश्यक दस्तावेजों सहित हलफनामा भी देना होगा और सुनवाई के दिन—11 जुलाई को—दल के अध्यक्ष, महासचिव या प्रमुख की उपस्थिति अनिवार्य होगी।

राजनीतिक नजरिया: आंदोलन से मौन तक की यात्रा

छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा एक समय दल्लीराजहरा के श्रमिक आंदोलन की आवाज हुआ करता था। किंतु बीते वर्षों में न केवल यह दल चुनावी राजनीति से दूर हुआ, बल्कि संगठनात्मक गतिविधियों में भी उसका कोई नामोनिशान नहीं दिखा। इस कारण दल की राजनीतिक प्रासंगिकता अब सवालों के घेरे में है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नोटिस कई ऐसे क्षेत्रीय दलों के लिए संकेत है जो सिर्फ नाम मात्र के लिए पंजीकृत हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से कट चुके हैं।

अंतिम चेतावनी: आयोग सख्त, जवाब अनिवार्य

निर्वाचन आयोग की मंशा स्पष्ट है—ऐसे दलों को हटाना जो लोकतंत्र में भागीदारी नहीं निभा रहे हैं। आयोग की इस पारदर्शिता और जवाबदेही की प्रक्रिया से राजनीतिक दलों को अब लगातार सक्रिय रहना ही होगा।

यह मामला सिर्फ एक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आयोग की उस व्यापक नीति की झलक है, जिसके तहत पंजीकृत दलों की सक्रियता, जवाबदेही और पारदर्शिता की समीक्षा की जा रही है। बालोद जैसे जिले के लिए यह घटना प्रशासनिक सजगता और राजनीतिक स्वच्छता—दोनों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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