पहले से जारी था संभागीय अधिकारी का आदेश
मामले की जांच 12 सितंबर 2024 को ही पूर्ण हो चुकी थी और 20 जून 2025 को संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग दुर्ग द्वारा स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि शिक्षिका उषा बोरकर को निलंबित कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया गया था,लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी पीसी मरकले ने इस आदेश को न केवल नजरअंदाज किया बल्कि स्कूल संचालन समिति व ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद किसी ठोस कार्रवाई से परहेज किया।

निलंबन की बजाय दूसरे जगह पर किया अटैच
शिकायतों और जांच प्रतिवेदन के बावजूद विभाग ने पहले उषा बोरकर को निलंबित करने के बजाय उसे दूसरे शाला मे अटैच कर दिया | यह कदम स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों को और अधिक आक्रोशित कर गया। स्थानीय जनपद सदस्य ने डीईओ पर स्पष्ट आरोप लगाए कि वे आरोपी शिक्षिका को बचा रहे हैं।
आखिरकार चक्काजाम के बाद विभाग बैकफुट पर आया
क्षेत्रीय विधायक कुंवर सिंह निषाद व ग्रामीणों के नेतृत्व में बीजाभाठा में हुए चक्काजाम और विरोध प्रदर्शन ने पूरे मामले को फिर से गरमा दिया। इस दबाव के बाद 7 जुलाई को जिला शिक्षा अधिकारी पीसी मरकले ने निलंबन आदेश जारी किया। आदेश में उल्लेख है कि पूर्व में प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन और संभागीय अधिकारी के निर्देशों के आलोक में शिक्षिका को निलंबित किया गया है।

सवालों के घेरे में डीईओ मरकले की भूमिका
इस पूरे प्रकरण ने डीईओ की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है।
क्यों पहले ही जारी निर्देशों को समय रहते नहीं लागू किया गया?
जांच रिपोर्ट के बावजूद आरोपी को क्यों बचाया गया?
अब यह देखना बाकी है कि क्या विभाग इस पर और कोई आंतरिक अनुशासनात्मक जांच करेगा या यह प्रकरण केवल एक निलंबन आदेश तक सिमट जाएगा।




















