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श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती पर संगोष्ठी : भाजपा नेताओं ने कहा – राष्ट्रवाद के पुरोधा के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक

भाजपा कार्यालय बालोद में श्रद्धांजलि व विचार संगोष्ठी, पौधारोपण कर दी गई सच्ची श्रद्धांजलि

बालोद।भारतीय जनसंघ के संस्थापक, महान शिक्षाविद, राष्ट्रवादी चिंतक और भाजपा के प्रेरणास्रोत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर भाजपा जिला कार्यालय में श्रद्धांजलि व संगोष्ठी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके जीवन एवं योगदान को स्मरण किया गया। वक्ताओं ने उन्हें भारत की एकात्मता, अखंडता और राष्ट्रनिष्ठ राजनीति का सच्चा पुरोधा बताया।

इस अवसर पर पूर्व जिला अध्यक्ष पवन साहू ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। बेहद कम उम्र में उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कीं — 33 वर्ष की उम्र में कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति बने, और आगे चलकर देश के पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में उद्योग मंत्री के रूप में कार्य किया। लेकिन उनके राष्ट्रवादी विचारों के चलते मतभेद उभरे और उन्होंने मंत्रिमंडल से त्यागपत्र देकर 1951 में जनसंघ की स्थापना की, जो आगे चलकर भाजपा का आधार बना।

भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य कृष्णकांत पवार ने कहा कि डॉ. मुखर्जी जम्मू-कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाना चाहते थे। उन्होंने धारा 370 का संसद में विरोध किया और ऐलान किया था — “एक देश में दो प्रधान, दो निशान और दो संविधान नहीं चलेंगे”। इसी संकल्प को लेकर वह 1953 में बिना परमिट कश्मीर पहुंचे, जहां उन्हें गिरफ्तार कर नजरबंद कर दिया गया और 23 जून 1953 को रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके सपने को साकार करते हुए अनुच्छेद 370 हटाया है।

वरिष्ठ नेता यज्ञ शर्मा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी मानवता के उपासक और सैद्धांतिक राजनीति के प्रतीक थे। बंगाल में सांप्रदायिक विभाजन की कोशिशों को उन्होंने अपने साहसिक नेतृत्व से विफल किया। मुस्लिम लीग और ब्रिटिश सरकार की सांठगांठ से बिगड़ते माहौल के बीच उन्होंने हिन्दू महासभा के साथ मिलकर बंगाल के हिन्दुओं के अधिकारों की रक्षा की। वह सावरकर के राष्ट्रवाद से भी प्रभावित थे और विभाजन के घोर विरोधी थे।

वरिष्ठ नेता राजा दीवान ने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि आज भाजपा केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार और राज्य में डबल इंजन की सरकार चला रही है — यह सब डॉ. मुखर्जी के विचारों और आदर्शों की नींव पर ही संभव हुआ। उनके त्याग और बलिदान को यह राष्ट्र कभी नहीं भुला सकता।

जिला भाजपा महामंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी एक स्वाध्यायी महानायक थे, जिनके निजी पुस्तकालय में 85 हजार से अधिक किताबें थीं। वे नेहरू सरकार की नीतियों के मुखर विरोधी थे और संसद में उनके तार्किक प्रश्नों से सरकार को जवाब देना मुश्किल हो जाता था। दुर्भाग्यवश, ऐसे राष्ट्रनायक की मृत्यु षड्यंत्रपूर्वक की गई — यह राष्ट्र उनके बलिदान को सदैव स्मरण रखेगा।

संगोष्ठी का संचालन महामंत्री राकेश ‘छोटू’ यादव ने किया और आभार प्रदर्शन स्थानीय मंडल अध्यक्ष अरुण साहू ने किया। कार्यक्रम के अंत में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृति में पौधारोपण किया गया।

इस अवसर पर कमलेश सोनी, लोकेश श्रीवास्तव, माहेश्वरी ठाकुर, निशा योगी, प्रेम साहू, धर्मेंद्र साहू, गिरजेश गुप्ता, दीपक लोढ़ा, रवि प्रकाश पांडे, विनोद कौशिक, संतोष कौशिक, पुष्पेंद्र तिवारी, प्रीतम यादव, महेश पाठक, रविंद्र कुमार टेमरिया, संतोष साहू, वीरेंद्र साहू, सन्तलाल साहू, मुकेश कुमार, बाल सिंह साहू, शेरु जसूजा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

 

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