कैमरे में कैद हुई इस हरकत ने प्रशासनिक अभियान की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सवाल ये है कि जब नियम आम जनता की जान की हिफाजत के लिए बनाए जा रहे हैं, तो कुछ लोग अपनी चालाकी से इसे कैसे हल्का बना सकते हैं?
पेट्रोल पंपों ने दिखाई सख्ती, बिचौलियों ने खोल लिया नया ‘कारोबार’
जैसे ही पेट्रोल पंपों ने बिना हेलमेट पेट्रोल देना बंद किया, वैसे ही कुछ लोगों ने बाहर ही किराए का हेलमेट देने की शुरुआत कर दी।
20 रुपये देकर हेलमेट लीजिए, पेट्रोल भरवाइए और फिर हेलमेट लौटाकर निकल जाइए – यानी ना सुरक्षा की सोच, ना नियम का सम्मान।

प्रशासन भी हैरान, पुलिस कर रही समझाइश और कार्रवाई दोनों
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सड़क सुरक्षा के लिए लगातार समझाइश दी जा रही है। ज़रूरत पड़ने पर चालानी कार्रवाई भी हो रही है। लेकिन अब जब नियम को ही मजाक बना दिया जा रहा है, तो इसे रोकने के लिए नए कदम जरूरी हो गए हैं।
अब बड़ा सवाल – क्या हेलमेट सिर्फ पेट्रोल भरवाने की औपचारिकता है?
इस घटना ने प्रशासन की मंशा पर नहीं, बल्कि समाज की सोच पर सवाल खड़ा कर दिया है।
क्या लोगों को हेलमेट सिर्फ चालान से बचने और पेट्रोल भरवाने तक के लिए पहनना चाहिए, या वाकई अपनी और दूसरों की जिंदगी की कीमत समझनी चाहिए?

प्रदेशरुचि की अपील – नियमों को सहयोग समझिए, सजा नहीं
प्रशासन का आदेश लोगों की जान बचाने के लिए है, ना कि परेशान करने के लिए। बिचौलियों की यह हरकत न सिर्फ आदेश का मखौल है, बल्कि समाज की सुरक्षा को भी खतरे में डालती है।

इसलिए जरूरी है कि हम सभी मिलकर नियमों का पालन करें – और उन्हें तोड़ने वालों का समर्थन नहीं, विरोध करें।




















