बैठक में ओरमा और मेडकी के बुजुर्ग, पूर्व पंच, जनपद सदस्य और ग्राम विकास समिति के प्रमुख शामिल हुए। बैठक का मकसद था — गांव के विकास में हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करना।
बात सिर्फ योजनाओं की नहीं… ज़मीनी सुझावों की थी चर्चा
बैठक में जो सुझाव सामने आए, वे सीधे गांव की ज़रूरतों से जुड़े थे।
पंचायत मुख्यालय में बड़े सामुदायिक भवन का निर्माण
सड़क और नाली व्यवस्था में सुधार
ओरमा और मेडकी दोनों में सार्वजनिक शौचालयों की ज़रूरत
वृक्षारोपण अभियान, जो सिर्फ मुक्तिधाम तक सीमित न रहे, बल्कि हर सार्वजनिक स्थान को हरा-भरा करे
और सबसे अहम – समय पर मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता
बुजुर्ग बोले – “ऐसी पहल पहले कभी नहीं देखी!”
पूर्व जनपद सदस्य प्यारेलाल केसरिया ने कहा – “गर्मियों में पेयजल जैसी सबसे जरूरी सेवा को भी सरपंच ने समय पर उपलब्ध कराया, ये काबिले तारीफ है।”

पूर्व सरपंच बंधु लाल यादव ने सुझाया –> “पुरानी बस्ती में तालाब पार एक साफ-सुथरा सार्वजनिक शौचालय गांव की बड़ी ज़रूरत है। इससे सामाजिक आयोजनों में स्वच्छता बनी रहेगी।”
भेष कुमार साहू और नेम लाल साहू जैसे वरिष्ठों ने वृक्षारोपण और मूलभूत सेवाओं की बात उठाई और सरपंच की पहल को “व्यावहारिक और सामूहिक सोच” बताया।
एक महिला सरपंच… और ऐसी जनभागीदारी!
बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने एकमत से कहा कि ये पहला मौका है जब गांव की महिला सरपंच ने दोनों गांवों के बुजुर्गों, प्रमुख नागरिकों और विकास समिति के सदस्यों को एक मंच पर बैठाकर सीधा संवाद किया और विकास में भागीदार बनाया।
सम्मान और सहयोग से आगे बढ़ेगा गांव
इस संयुक्त बैठक में उपसरपंच रामचंद्र यादव समेत बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और अपनी बात खुलकर रखी। बैठक में यह संदेश भी गया कि अगर हर गांव में ऐसा संवाद हो, तो विकास सिर्फ योजना बनकर नहीं, जमीनी बदलाव बनकर नजर आएगा।




















