
सीएम साय ने इस मौके पर कहा – “ये सिर्फ चप्पल नहीं है… ये उन लोगों के श्रम, स्वाभिमान और संघर्ष को सम्मान देने का जरिया है, जो जंगलों में दिनभर पत्ते चुनते हैं ताकि अपने परिवार का पेट भर सकें।”
क्यों खास है ये योजना?
तेंदूपत्ता संग्राहकों को जंगलों में नंगे पांव चलना पड़ता है, जिससे उन्हें अक्सर चोटें और संक्रमण होते हैं।
‘चरण पादुका योजना‘ उनके पैरों की सुरक्षा के साथ-साथ उनके आत्मसम्मान को भी बढ़ाती है।
यह योजना मोदी सरकार की “गारंटी” का हिस्सा है, जिसे छत्तीसगढ़ की नई सरकार ने जमीनी स्तर पर लागू किया है।
सीएम साय का बड़ा बयान
मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि यह योजना सिर्फ चप्पल बांटने की स्कीम नहीं है, बल्कि वनवासियों की जिंदगी को बेहतर बनाने का संकल्प है।
“तेंदूपत्ता संग्राहक हमारे राज्य की अर्थव्यवस्था और वनोपज परंपरा की रीढ़ हैं। उनकी मेहनत से ही ये परंपरा जीवित है। हमने वादा किया था, आज उसे निभा रहे हैं।”

मोदी की गारंटी का असर दिखने लगा
मुख्यमंत्री ने ‘चरण पादुका योजना’ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी करार देते हुए कहा कि हर योजना, हर लाभ अब सीधे ज़रूरतमंदों तक पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में संग्राहकों को अन्य सुविधाएं भी दी जाएंगी ताकि उनका जीवन और सुरक्षित, और गरिमामय हो सके।




















