फाइल फोटो
बालोद। पुरी (ओडिशा) की जगप्रसिद्ध रथयात्रा की तर्ज पर बालोद जिले में भी भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भ्राता बलभद्र की भव्य रथयात्रा परंपरागत आस्था के साथ निकलती है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 27 जून शुक्रवार को कपिलेश्वर मंदिर से यह रथयात्रा निकाली जाएगी, जिसकी तैयारियाँ नगर पालिका द्वारा युद्धस्तर पर की जा रही हैं।
🎡 रथ सजकर हुआ तैयार, नगर पालिका कर रही अंतिम रूप से तैयारियाँ
नगर के प्रथम नागरिक नगर पालिका अध्यक्ष रथयात्रा का शुभारंभ करेंगे। रथ को पारंपरिक रंगों और सजावट से सजाया जा रहा है। कपिलेश्वर मंदिर में भगवान जगन्नाथ स्वामी, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र की विशेष पूजा-अर्चना के पश्चात दोपहर 2 बजे यात्रा प्रारंभ होगी।
🚩 यह रहेगा रथयात्रा का मार्ग:
रथयात्रा कपिलेश्वर मंदिर से प्रारंभ होकर हलधरनाथ चौक, मोखलामांक्षी मंदिर, जयस्तंभ चौक, पुराना बस स्टैंड, सदर रोड, बुधवारी बाजार होते हुए महामाया मंदिर (मौसी का घर) पहुंचेगी, जहां भगवान कुछ समय के लिए विश्राम करेंगे।
🙏 श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, रस्सी खींचने होड़
बालोद ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों और नगरों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में भाग लेने आते हैं। रथ की रस्सी खींचने को भक्त सौभाग्य मानते हैं। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे—सभी पूरे उत्साह से इस यात्रा में शामिल होते हैं। इस दिन शहर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।
दल्लीराजहरा, गुण्डरदेही, गुरूर, डौंडी में भी रथयात्रा की धूम
रथयात्रा की भव्यता सिर्फ बालोद तक सीमित नहीं। जिले के अन्य नगरों जैसे दल्लीराजहरा, डौंडी, डौंडी लोहारा, गुरूर और गुण्डरदेही में भी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा धूमधाम से निकाली जाएगी। विशेषकर दल्लीराजहरा में इस आयोजन का विशेष महत्व है, जहां स्थानीय समितियाँ कई वर्षों से रथयात्रा को सामूहिक सहभागिता से संपन्न कराती हैं।
📜 परंपरा का निर्वाह: वर्ष 2000 से पहले भी कपिलेश्वर मंदिर ही रहा केंद्र
यह रथयात्रा सालों पुरानी परंपरा का निर्वाह करती है। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के पूर्व से ही कपिलेश्वर मंदिर से यह रथयात्रा निकलती रही है। न कभी आयोजन स्थगित हुआ, न ही इसकी पवित्रता में कोई कमी आई। यही इस परंपरा की ताकत है।
प्रशासनिक व्यवस्था: सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सख्त यात्रा के दौरान पुलिस विभाग, नगर पालिका, स्वास्थ्य विभाग और स्वयंसेवी संगठन मिलकर सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और यातायात प्रबंधन सुनिश्चित कर रहे हैं।
बालोद की रथयात्रा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक धरोहर और परंपरागत मूल्यों का जीवंत उदाहरण भी है। आने वाले शुक्रवार को बालोद भक्तिरस से सराबोर होगा।




















