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“हंसी का आखिरी सलाम” पद्मश्री हास्य कवि डॉ. सुरेन्द्र दुबे नहीं रहे | साहित्य और संवेदना में शोक की लहर

 

रायपुर, छत्तीसगढ़ की धरती से एक गूंज हमेशा के लिए शांत हो गई—हास्य और व्यंग्य के मंच पर लोगों को हँसते-हँसते सोचने पर मजबूर करने वाले पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे अब हमारे बीच नहीं रहे। गुरुवार को रायपुर स्थित एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। वे 72 वर्ष के थे।

परिजनों के अनुसार, उन्हें कुछ दिन पहले सीने में तकलीफ हुई थी। इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद दोपहर करीब 4:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना भाजपा प्रवक्ता उज्जवल दीपक द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से दी गई।

🎭 कविता के मंच से जीवन की सीख तक

बेमेतरा में 1953 में जन्मे डॉ. दुबे ने अपने जीवन की शुरुआत एक आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में की, लेकिन उनकी पहचान बनी हास्य और व्यंग्य के अप्रतिम कवि के रूप में।
उनकी रचनाएँ केवल हँसी तक सीमित नहीं थीं—वे समाज की गहरी विडंबनाओं को हल्के शब्दों में बड़ी मारकता से प्रस्तुत करते थे।

वे अक्सर कहा करते थे — “हँसते रहो, क्योंकि आंसू तो सबको आते हैं।”
उनके इसी दर्शन ने उन्हें जन-जन का कवि बना दिया।

🏆 सम्मान और उपलब्धियाँ

वर्ष 2010 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से नवाज़ा।

अनेक टीवी कवि सम्मेलनों में देशभर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

हास्य के साथ-साथ गूढ़ सामाजिक संदेशों से ओतप्रोत 5 से अधिक किताबें लिखीं।

उन्हें काका हाथरसी सम्मान से भी विभूषित किया गया।

🙏 साहित्य-जगत और प्रदेश में शोक की लहर

डॉ. दुबे के निधन की सूचना फैलते ही प्रदेशभर के साहित्य प्रेमियों, लेखकों और कलाकारों में शोक की लहर दौड़ गई। रायपुर कलेक्टर और कई जनप्रतिनिधियों ने अस्पताल पहुँचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।छत्तीसगढ़ सरकार और साहित्य परिषद की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कई स्कूल-कॉलेजों और सांस्कृतिक संस्थाओं में उनके सम्मान में मौन रखा गया।

📜 उनकी रचनाओं की कुछ पंक्तियाँ जो हमेशा याद रहेंगी:

“हँसी तो रोज हँसते हैं लोग,

पर जो रुला दे—वो व्यंग्य है।

शब्द नहीं, चोट है कवि की,

जो दिल के भीतर जंग है!”

 

 अंतिम विदाई

डॉ. सुरेन्द्र दुबे का अंतिम संस्कार शुक्रवार सुबह 10:30 बजे रायपुर के मारवाड़ी श्मशान घाट में संपन्न होगा। उनके चाहने वालों से अंतिम दर्शन हेतु अपील की गई है।

 

प्रदेशरुचि परिवार की ओर से डॉ. सुरेन्द्र दुबे को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।
हास्य का यह सूर्य भले अस्त हो गया,
पर उसकी किरणें सदा हिंदी साहित्य में चमकती रहेंगी।

देशभर से सोशल मीडिया पर  शोक संवेदना जारी

https://x.com/DrKumarVishwas/status/1938198469367488910?t=QQGiFpUblZ5iNLRXY52a0w&s=19

https://x.com/vijaysharmacg/status/1938199055777313048?t=P3g0nnGMEEM154UHx00prg&s=19

 

 

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