पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने 19 सितंबर 2024 को डौंडी थाने में शिकायत दर्ज करानी चाही थी, लेकिन तत्कालीन थाना प्रभारी ने इसे आपसी लेन-देन बताते हुए पुलिस हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और उन्हें अदालत जाने की सलाह दी। इससे निराश होकर अब महिलाएं कलेक्टर के पास पहुँची हैं।

मंगलवार को बालोद कलेक्ट्रेट स्थित जनचौपाल में पीड़ित महिलाओं ने कलेक्टर को आवेदन सौंपते हुए आरोपी महिलाओं पूजा भारद्वाज (पति राजेन्द्र भारद्वाज) और सिंधिया गुलेन्द्र (पति टीकम गुलेन्द्र) के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। बताया गया कि दोनों आरोपी महिलाएं दल्ली राजहरा की निवासी हैं और हल्बा जाति से संबंधित हैं।
हर माह भर रही हैं 52 हजार की किश्त, बेचने पड़ रहे घर के धान-चावल और गहने
महिलाओं का आरोप है कि पूजा और सिंधिया ने समूह की महिलाओं से झूठ बोलकर कहा था कि वे ऋण की किश्तें समय-समय पर भर देंगी। यहां तक कि उन्होंने 50 रुपए के स्टाम्प पेपर पर शपथ पत्र भी दिया, लेकिन बाद में वादे से मुकर गईं। अब समूह की महिलाएं हर माह 52 हजार रुपए की किश्त भर रही हैं। पैसे के लिए उन्हें अपने घर का धान, चावल और यहां तक कि गहने भी बेचने पड़ रहे हैं।
पीड़ित महिलाओं ने बताया कि कर्ज न चुका पाने के कारण घरों में कलह की स्थिति बन गई है, मारपीट और गाली-गलौज जैसी घटनाएं हो रही हैं। अगर जल्द न्याय नहीं मिला, तो कोई बड़ी अनहोनी भी हो सकती है।
एफआईआर दर्ज कराने की बात पर महिलाएं कहती हैं कि थाने ने रिपोर्ट लेने से मना कर दिया था, जिस कारण न्याय के लिए कलेक्टर से गुहार लगानी पड़ी।
ज्ञापन सौंपने वालों में ये महिलाएं रहीं शामिल: चंद्रिका बाई, लता बाई, लक्ष्मी बाई, टिकेश्वरी, ललिता, कमिता, ख़ोमिन, सुनोतिन, सुशील बाई सहित समूह की अन्य महिलाएं इस दौरान कलेक्ट्रेट में उपस्थित रहीं।




















