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इमरजेंसी की 50वीं बरसी पर कांग्रेस पर भाजपा का तीखा हमला….बोले सत्ता की भूख ने लोकतंत्र को बंधक बना दिया था

बालोद, 25 जून 1975 — वो रात जब देश की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था अचानक तानाशाही के साए में डूब गई। इमरजेंसी के 50 साल पूरे होने पर मंगलवार को बालोद के सर्किट हाउस में बीजेपी ने कांग्रेस पर खुलकर हमला बोला। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के अध्यक्ष और प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी ने कहा —“इंदिरा गांधी ने सत्ता बचाने के लिए न संविधान छोड़ा, न लोकतंत्र। देश की आत्मा पर रातों-रात हमला कर उसे एक परिवार की जागीर बना दिया गया।

इमरजेंसी को बताया ‘तानाशाही की प्रयोगशाला’

भूपेंद्र सवन्नी ने कहा कि अनुच्छेद 352 का दुरुपयोग कर लोकतंत्र को एक झटके में तानाशाही में बदल दिया गया।
कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका को सत्ता की कठपुतली बना दिया गया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने आंतरिक अशांति का बहाना बनाया, जबकि असल वजह थी चुनाव में मिली न्यायिक चुनौती और सत्ता जाने का डर।”12 जून 1975 को जब कोर्ट ने इंदिरा गांधी के चुनाव को अमान्य घोषित किया और उन्हें अयोग्य ठहराया, तब उन्होंने देश पर इमरजेंसी थोप दी।”

बिजली काट दी, प्रेस रोका गया, नेताओं को जेल में डाला गया

सवन्नी ने उस दौर की भयावह तस्वीर पेश करते हुए कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता को रौंदा गया —
बड़े अखबारों की बिजली काट दी गई, सेंसरशिप थोपी गई, और जो विरोध करता, उसे जेल में डाल दिया गया।”1975 की इमरजेंसी कोई युद्ध का नतीजा नहीं थी… ये एक डरी हुई प्रधानमंत्री की कुर्सी बचाने की चाल थी।”

आज भी वही मानसिकता: बदला सिर्फ तरीका

सवन्नी ने कहा कि आज कांग्रेस सत्ता में नहीं है, इसलिए लोकतंत्र की बात करती है, लेकिन जहां-जहां वह सत्ता में है, वहां विरोध का गला घोंटा जा रहा है। “कांग्रेस आज भी ‘राहुल-प्रियंका’ तक सीमित है। सरकार नहीं, एक परिवार के चरणों में तंत्र बंधक है।”

उन्होंने कहा कि आज लोकतंत्र पर डिजिटल इमरजेंसी थोपी जा रही है — “तरीका बदल गया है, मगर मंशा आज भी वही तानाशाही वाली है।”

इतिहास का वह मोड़:

मार्च 1971: इंदिरा गांधी भारी बहुमत से जीतीं

राजनारायण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनाव को चुनौती दी

12 जून 1975: कोर्ट का बड़ा फैसला — इंदिरा गांधी अयोग्य घोषित

25 जून 1975 की रात: इमरजेंसी लागू — प्रेस बंद, विपक्ष जेल में, अधिकार खत्म

इंदिरा इज इंडिया” नारा नहीं, मानसिकता थी”

भूपेंद्र सवन्नी ने कहा कि ‘इंदिरा इज इंडिया’ और ‘इंडिया इज इंदिरा’ जैसे नारे सिर्फ एक तानाशाही सोच का आईना थे।
कांग्रेस ने पूरे देश को व्यक्ति पूजा और परिवारवाद की प्रयोगशाला बना दिया था। “आज भी कांग्रेस की रीढ़ सिर्फ एक परिवार है, और उसी के चारों ओर सत्ता का चक्र घूमता है।”

कांग्रेस शासित राज्यों में आज का सच:

भूपेंद्र सवन्नी ने कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों में आज विरोध का दमन, धार्मिक तुष्टिकरण और सत्ता का घमंड खुलेआम देखा जा सकता है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये रहे प्रमुख चेहरे:

इस दौरान  –सांसद  भोजराज नाग, जिला भाजपा अध्यक्ष चेमन देशमुख, वरिष्ठ नेता यशवंत जैन, निर्वतमान जिला अध्यक्ष पवन साहू, पूर्व जिला अध्यक्ष कृष्णकांत पवार, वरिष्ठ नेता प्रीतम साहू, यज्ञदत्त शर्मा, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अभिषेक शुक्ला, जिला महामंत्री राकेश ‘छोटू’ यादव, नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी, जिला मीडिया प्रभारी कमल पनपालिया, और सोशल मीडिया जिला संयोजक संदीप सिन्हा  मौजूद रहे।

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