बालोद, भारतीय किसान संघ, जिला बालोद ने किसानों की विभिन्न समस्याओं और 6 सूत्रीय मांगों को लेकर शुक्रवार को एसडीएम कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन ने सरकार पर आरोप लगाया कि एक साल से अधिक बीत जाने के बाद भी किसान हितैषी वादों को ज़मीन पर उतारने में विफलता रही है।
ज्ञापन में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार ने सत्ता में आते समय किसानों को ‘मोदी की गारंटी’ और हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का वादा किया था, लेकिन अब तक किसानों को अपेक्षित राहत नहीं मिली है।
📌 यह थीं किसानों की 6 प्रमुख मांगे
1. खाद की कालाबाजारी पर रोक
सहकारी समितियों में खाद की अनुपलब्धता के चलते किसान निजी दुकानों से महंगे दाम पर खाद खरीदने को मजबूर हैं। कई स्थानों पर नकली या खराब खाद बेचने की शिकायत भी सामने आई है। किसानों ने इस पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
2. धान समर्थन मूल्य का लाभ तुरंत मिले
केंद्र सरकार द्वारा 186 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी का लाभ किसानों को अब तक नहीं मिला है। किसान चाहते हैं कि इस वर्ष के धान विक्रय में यह लाभ अवश्य मिले।
3. पिछली सरकार की चौथी किश्त का भुगतान
पूर्ववर्ती सरकार द्वारा घोषित धान की चौथी किश्त की राशि का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। किसानों ने तत्काल भुगतान की मांग की है।
4. फसल विविधीकरण हेतु प्रोत्साहन राशि बहाल हो
दलहन-तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहन देने वाली पुरानी योजना को फिर से लागू कर किसानों को 20,000 रुपये प्रति एकड़ की सहायता दी जाए।
5. पंप लाइन बिजली आपूर्ति बाधित न हो
बार-बार बिजली कटौती से सिंचाई कार्य बाधित हो रहा है। किसानों ने तत्काल सुधार की मांग की है।
6. गन्ना और सिंचाई की मांगें
गन्ना की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने के साथ-साथ रविशंकर जलाशय (गंगरेल बांध) को लिंक नहर के माध्यम से तांदुला बांध से जोड़ने की मांग की गई है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान किसान संघ के पदाधिकारी मनहरन, ताम्रध्वज साहू, चाणक्य लाल सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ठोस कार्यवाही नहीं हुई, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।




















