मीडिया विरोध के आगे झुकी सरकार: स्वास्थ्य मंत्री ने ‘मीडिया प्रबंधन आदेश’ पर लगाई रोक…”बिना संवाद के कोई निर्णय नहीं होगा” – श्याम बिहारी जायसवाल
रायपुर, शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में मीडिया की आवाजाही और रिपोर्टिंग पर नियंत्रण लगाने वाले आदेश को लेकर प्रदेशभर में मचे बवाल के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई है। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी विवादित आदेश तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है और स्वास्थ्य क्षेत्र में उसकी पारदर्शी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
दिनभर गूंजा विरोध का स्वर
13 जून को चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा आदेश जारी कर सभी शासकीय मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में मीडिया की गतिविधियों को एक तय प्रोटोकॉल के तहत सीमित करने की बात कही गई थी। इसमें मीडिया के प्रवेश, रिपोर्टिंग, और फोटो-वीडियो कवरेज के लिए खास मंजूरी और नोडल अधिकारी से अनुमति अनिवार्य की गई थी।
जैसे ही यह आदेश सामने आया, प्रदेशभर के पत्रकार संगठनों, प्रेस क्लबों और विपक्षी दलों ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला करार देते हुए तीखा विरोध दर्ज कराया। सोशल मीडिया पर भी #मीडिया_की_आवाज_मत_रोकों जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
स्वास्थ्य मंत्री ने दी राहत की घोषणा
बढ़ते विरोध और विपक्ष के हमलों के बीच स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा –
> “मीडिया का सम्मान हमारे नजरों में सदैव से रहा है। फिलहाल मीडिया प्रबंधन के लिए जारी दिशा-निर्देशों पर रोक लगा रहा हूं। किसी भी प्रकार का निर्णय सभी मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा करने के उपरांत ही करेंगे।”
उन्होंने कहा कि आदेश को लेकर जो भी संदेह या असहमति है, उस पर सभी संबंधित पक्षों से चर्चा कर नया ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा ताकि स्वतंत्र मीडिया और संवेदनशील चिकित्सा व्यवस्था दोनों के बीच संतुलन बना रहे।
विपक्ष ने बताया ‘लोकतंत्र की जीत’
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा और अब मंत्री की घोषणा को “मीडिया की एकजुटता और लोकतंत्र की जीत” बताया। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह सरकार की तानाशाही सोच को उजागर करता है, जो जनदबाव में आकर वापस हुई।
प्रेस क्लबों ने किया निर्णय का स्वागत
छत्तीसगढ़ प्रेस क्लब, रायपुर, दुर्ग, बालोद, बिलासपुर सहित कई जिलों में पत्रकारों ने इस रोक का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार को कोई भी निर्णय लेने से पूर्व पत्रकार संगठनों से विचार-विमर्श अवश्य करना चाहिए। जिला प्रेस क्लब बालोद ने भी घोषणा की है कि यदि दोबारा ऐसा कोई आदेश आता है तो पहले से ज़्यादा मजबूती से विरोध किया जाएगा।




















