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अब कैंसर का इलाज सर्जरी या कीमो के बिना? जानिए भारतीय वैज्ञानिकों की नई खोज जो आपकी सेहत के लिए वरदान बन सकती है

🔬 अब कैंसर का इलाज बिना सर्जरी और बिना कीमो के?

भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित की ऐसी तकनीक, जो कैंसर को “हीट” से जला देती है।

मोहाली/मुंबई। कैंसर के इलाज में एक बड़ी सफलता सामने आई है। भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसी अनोखी नैनो तकनीक विकसित की है, जो शरीर में जाकर कैंसर को ‘ताप’ से जला सकती है। इसे नैनो-कप आधारित फोटोथर्मल थेरेपी कहा जा रहा है।

इस खास तकनीक को आईएनएसटी मोहाली, आईआईटी बॉम्बे और टाटा मेमोरियल सेंटर के वैज्ञानिकों ने मिलकर तैयार किया है। इसमें बेहद सूक्ष्म (नैनो-स्तर) कप जैसे कण बनाए गए हैं, जो शरीर के अंदर जाकर सिर्फ कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाते हैं और उन्हें गर्मी से नष्ट कर देते हैं।

🧪 क्या है यह तकनीक?

कैंसर जैसी घातक बीमारी के इलाज में भारत ने एक और बड़ा वैज्ञानिक कदम बढ़ाया है।
आईएनएसटी मोहाली, आईआईटी बॉम्बे और टाटा मेमोरियल सेंटर (ACTREC) के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक बेहद उन्नत तकनीक विकसित की है, जिसमें नैनो-कप जैसे कण कैंसर कोशिकाओं को सीधे नष्ट कर सकते हैं — वह भी बिना किसी सर्जरी, रेडिएशन या कीमोथेरेपी के।

इस तकनीक का नाम है:

🧬 PEGylated Semi-Shells (SS) आधारित फोटोथर्मल थेरेपी।

⚙️ कैसे काम करती है ये विधि?

यह तकनीक नैनो साइंस पर आधारित है, जिसमें सोने (Gold) के अति सूक्ष्म कणों (नैनो-कणों) को कप जैसे आकार में ढाला गया है।
इन नैनो-कप को शरीर में संक्रमित हिस्से (ट्यूमर) तक पहुंचाया जाता है। फिर वहां विशेष प्रकार की इन्फ्रारेड लाइट डाली जाती है, जिससे ये कण गर्म होकर केवल कैंसर कोशिकाओं को जला देते हैं, जबकि स्वस्थ कोशिकाएं सुरक्षित रहती हैं।

इस प्रक्रिया को फोटोथर्मल एब्लेशन कहते हैं।

🛠️ क्या है इस शोध की खासियत?

🔹 वन-स्टेप सिंथेसिस विधि:
पहली बार बिना किसी भारी उपकरण, विषैले रसायन या उच्च तापमान के यह कण सिर्फ कमरे के तापमान पर तैयार किए गए हैं।

🔹 ZIF-8 टेम्पलेट:
इस तकनीक में एक जैव-अनुकूल पदार्थ ZIF-8 का उपयोग ‘टेम्पलेट’ के रूप में किया गया, जिसे बाद में हटाकर सोने के कण उसकी जगह बढ़ते हैं। इस प्रक्रिया को etching कहते हैं।

🔹 विटामिन-C की भूमिका:
सोने के कणों को जमाने के लिए सामान्य एस्कॉर्बिक एसिड (विटामिन C) का इस्तेमाल किया गया, जिससे यह विधि और भी सुरक्षित व पर्यावरण अनुकूल हो जाती है।

🔹 PEG कोटिंग:
इन नैनो-कप्स को PEG (पॉलीइथिलीन ग्लाइकॉल) से कोट किया गया है, जो उन्हें रक्त में घुलने योग्य, स्थिर और दीर्घकालीन रूप से प्रभावी बनाता है।

🧫 परीक्षण और प्रभाव

यह तकनीक अभी प्री-क्लिनिकल परीक्षण (चूहों पर) के चरण में है। परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं:

मेटास्टेटिक स्तन कैंसर के ट्यूमर पूरी तरह नष्ट किए गए।
✅ जीवित रहने की दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
✅ ट्यूमर के दोबारा लौटने की संभावना भी बेहद कम रही।

🧭 भविष्य की संभावनाएं

वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तकनीक का भविष्य बेहद उज्ज्वल है:

🔹 इसे कीमोथेरेपी के साथ मिलाकर और ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता है (Chemo-Photothermal therapy)।
🔹 यह तकनीक कैंसर कोशिकाओं की पहचान के लिए SERS (Surface Enhanced Raman Spectroscopy) आधारित बायोसेंसर निर्माण में भी मददगार हो सकती है।
🔹 इसके शेल्फ लाइफ और सेफ इंट्रावेनस एडमिनिस्ट्रेशन जैसी खूबियाँ इसे मेडिकल प्रैक्टिस में लाने की दिशा में मजबूत आधार देती हैं।

🧑‍⚕️ आम जनता के लिए क्या मायने हैं?

> “अगर यह तकनीक मानव परीक्षणों में सफल होती है, तो भविष्य में कीमोथेरेपी और सर्जरी जैसे तकलीफदेह विकल्पों की आवश्यकता कम हो सकती है।”— वैज्ञानिक टीम का दावा

 

👉 यह तकनीक खासतौर पर उन मरीजों के लिए वरदान बन सकती है, जो कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावों से जूझ रहे हैं।

 

भारतीय वैज्ञानिकों की यह खोज कैंसर इलाज की दुनिया में सस्ता, सुरक्षित और प्रभावी विकल्प प्रस्तुत करती है। आने वाले समय में यह तकनीक हर मरीज की पहुंच में हो, इसके लिए सरकारी और निजी स्तर पर ट्रायल व उत्पादन की दिशा में प्रयास तेज होने की उम्मीद है।

 

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