धमतरी/बालोद। सरकारी नौकरी और ट्रांसफर का सपना दिखाकर लोगों से ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। मुख्य आरोपी बालोद जिले के तवेरा गांव का रहने वाला तिलक यादव निकला, जिसे धमतरी जिले की सिहावा पुलिस ने दुर्ग से गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी पर आरोप है कि उसने मंत्रालय के नाम पर फर्जी आदेश जारी कर 6 लाख 45 हजार रुपए की ठगी की थी।
📌 कैसे हुआ खुलासा?
प्रार्थी शैलेन्द्र चंचल चाणक्य, निवासी देवपुर (थाना सिहावा), ने थाना सिहावा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि पूर्व परिचित तिलक यादव और उसके साथियों ने यह कहकर भरोसा जीत लिया कि वे उसका ट्रांसफर करवा सकते हैं और उसके बेटे को सरकारी नौकरी दिलवा सकते हैं।
इस झांसे में आकर प्रार्थी ने किश्तों में कुल ₹6,45,000/- की रकम आरोपी को दे दी। इसके एवज में उसे मंत्रालय की सील समेत फर्जी नियुक्ति पत्र और स्थानांतरण आदेश की फोटो कॉपी सौंपी गई।
⚠️ राजीनामे के नाम पर दूसरा धोखा
जब प्रार्थी ने संदेह जताते हुए रकम वापसी की मांग की, तो आरोपी ने ₹5.5 लाख वापस करने का वादा किया और राजीनामे के नाम पर फर्जी इकरारनामे तैयार करवा लिए। लेकिन न तो पैसे लौटाए गए और न ही कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत किया गया। तब जाकर पीड़ित ने पुलिस का रुख किया।
👮♂️ आरोपी की गिरफ्तारी ऐसे हुई
सिहावा पुलिस ने मामला दर्ज कर त्वरित जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर से मिली जानकारी के आधार पर पता चला कि आरोपी इन दिनों दुर्ग के पद्मनाभपुर क्षेत्र में किराए के मकान में रह रहा है।इस पर एएसआई दुलाल नाथ के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई और घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
⚖️ जेल भेजा गया, एक आरोपी अभी फरार
आरोपी से पूछताछ के दौरान कोई वैध दस्तावेज नहीं मिले। पुलिस ने उसे धारा 420, 467, 468, 471, 34 भादवि के तहत अपराध क्रमांक 39/25 में गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।इस मामले में एक अन्य आरोपी अब भी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
🚨 धमतरी पुलिस की जनता से अपील:
> “सरकारी नौकरी या स्थानांतरण के नाम पर कोई भी व्यक्ति आपसे पैसे मांगे, तो सतर्क रहें। किसी भी दस्तावेज को बिना जांचे-परखे स्वीकार न करें। संदेहास्पद गतिविधियों की सूचना तत्काल पुलिस को दें।”




















