झलमला के स्वामी आत्मानंद स्कूल की हालत खस्ता, जन चौपाल में कलेक्टर को सौंपा गया ज्ञापन
बालोद।जिला मुख्यालय से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम झलमला का स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय वर्षों से जर्जर भवन और शिक्षकों की भारी कमी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। बच्चों की शिक्षा और जीवन से जुड़ी इस चिंता को लेकर मंगलवार को युवा कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने कलेक्टोरेट पहुंचकर जन चौपाल में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
इस दौरान जिला युवा कांग्रेस के प्रशासनिक महामंत्री आदित्य दुबे ने बताया कि स्वामी आत्मानंद स्कूल के भवन की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। लगातार कई वर्षों से भवन की मरम्मत की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक न तो प्रशासन ने सुध ली है और न ही शिक्षा विभाग ने कोई ठोस कदम उठाया है।
उन्होंने कहा, “यदि समय रहते जर्जर भवन की मरम्मत नहीं की गई तो भविष्य में बड़ी दुर्घटना हो सकती है। कई स्कूल भवन इतने जर्जर हैं कि कभी भी गिर सकते हैं। ऐसे में बच्चों की जान जोखिम में है।”
शिक्षकों की भारी कमी से भी जूझ रहे स्कूल
आदित्य दुबे ने यह भी बताया कि स्कूलों में शिक्षकों की भी भारी कमी है, जिससे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों की उपस्थिति और शैक्षणिक माहौल दोनों जरूरी हैं, लेकिन यहां दोनों की ही कमी है।
युवा कांग्रेस ने दी चेतावनी
युवा कांग्रेस ने सरकार और जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो जिला युवा कांग्रेस ग्रामीणों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन करेगी।
मुख्य मांगे –
1. जर्जर शाला भवनों की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
2. शिक्षकों की कमी को अविलंब दूर किया जाए।
3. बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हेतु आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
4. विद्यार्थियों के भविष्य और जीवन की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान उपस्थित रहे –
ज्ञापन सौंपते समय ग्राम पंचायत झलमला के उपसरपंच हितेश ठाकुर, पंच रवि साहू, शहर युवा कांग्रेस अध्यक्ष साजन पटेल, पार्षद सुमित शर्मा, दिनेश्वर साहू, सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, अभिभावक एवं क्षेत्र के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
स्वामी आत्मानंद स्कूल जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान की उपेक्षा न केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई को बाधित कर रही है, बल्कि उनके भविष्य को भी संकट में डाल रही है। युवा कांग्रेस की इस पहल ने एक बार फिर शिक्षा के बुनियादी ढांचे की जमीनी हकीकत को उजागर किया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक और कितना असरदार कदम उठाता है।




















