पूर्व पार्षद स्वप्निल तिवारी ने नपाध्यक्ष तोरण साहू और सफाई प्रभारी पर साधा निशाना
बालोद/दल्ली राजहरा।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत मिशन की जमीनी हकीकत दल्ली राजहरा टाउनशिप के वार्ड क्रमांक 08 में दम तोड़ रही है। यहां नालियों में गंदगी भरी है, सड़कों पर कचरे के ढेर हैं, और बारिश से पहले लोगों में जलभराव की आशंका को लेकर भारी चिंता है।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि खुद नगर पालिका अध्यक्ष तोरण लाल साहू और स्वच्छता प्रभारी अधिकारी सतीश चंद्राकर पर ही लापरवाही के गंभीर आरोप लग रहे हैं। कांग्रेस नेता और पूर्व पार्षद स्वप्निल तिवारी ने इन दोनों पर नगर की सफाई व्यवस्था को लेकर उदासीनता बरतने का आरोप लगाते हुए सीधे-सीधे स्वच्छ भारत मिशन का मखौल उड़ाने की बात कही है।

“15 साल से जमे हैं अधिकारी, जवाबदेही नहीं”
स्वप्निल तिवारी के मुताबिक, उन्होंने कई बार वार्ड 08 की सफाई को लेकर प्रभारी अधिकारी सतीश चंद्राकर से आग्रह किया, लेकिन अधिकारी का रवैया टालमटोल वाला और गैर-जिम्मेदाराना रहा। “वे खुलेआम कहते हैं कि चाहे किसी की भी सरकार हो, कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता,” – तिवारी का आरोप है।
स्वप्निल ने यह भी बताया कि अधिकारी पिछले 15 वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं और उनकी निष्क्रियता के चलते टाउनशिप की जनता मूलभूत सफाई सुविधाओं से वंचित है।
नपाध्यक्ष पर भी गंभीर आरोप
वार्ड 08 के पूर्व पार्षद स्वप्निल तिवारी ने नगर पालिका अध्यक्ष तोरण लाल साहू (भाजपा नेता) पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अध्यक्ष द्वारा वार्ड का दौरा करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। “यह जानबूझकर किया जा रहा है या फिर कार्यशैली की कमजोरी है, लेकिन इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है,”

जनता पूछ रही है सवाल, जिम्मेदार कौन?
टाउनशिप में नालियों की सफाई न होने के कारण बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या गंभीर हो सकती है। तिवारी ने सवाल किया कि अगर लोगों के घरों में पानी भरता है, बीमारियाँ फैलती हैं, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
स्वप्निल ने चेताया कि इस स्थिति की पूरी जिम्मेदारी नगर पालिका अध्यक्ष और सफाई प्रभारी की होगी। साथ ही उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि अधिकारी के लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ रहने की जांच हो और जिम्मेदारों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
यह मामला सिर्फ एक वार्ड की सफाई व्यवस्था का नहीं है, बल्कि प्रशासनिक अकर्मण्यता, राजनीतिक संरक्षण, और जवाबदेही की कमी का उदाहरण बन चुका है। प्रधानमंत्री द्वारा चलाई जा रही स्वच्छ भारत मिशन की जिस भावना को लेकर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं जमीनी स्तर पर नगरपालिकाओं में बैठे जिम्मेदार अधिकारी और पदाधिकारी इसे मजाक बनाकर छोड़ दे रहे हैं।
ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या टाउनशिप के लोगों को साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधा पाने के लिए भी राजनीति और लापरवाही का शिकार होना पड़ेगा?




















