
❗ शिक्षक साझा मंच की लगातार पैरवी लाई रंग
इस मामले में शिक्षक साझा मंच बालोद की सक्रिय भूमिका को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता। मंच के संचालक जितेन्द्र शर्मा ने बताया कि –
> “हम लगातार युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया में गड़बड़ी, फर्जी दस्तावेजों का उपयोग और अपनों को लाभ पहुंचाने जैसी अनियमितताओं को उजागर करते रहे हैं। हमने समय-समय पर जिला प्रशासन को इन गंभीर मामलों की जानकारी दी। अगर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो तो अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी तय है।”
जितेंद्र शर्मा ने बताया कि 10 जनवरी को शिक्षक साझा मंच ने बालोद कलेक्टर के समक्ष दस्तावेजों सहित शिकायत रखी थी, जिसमें स्पष्ट रूप से बताया गया था कि किन-किन शिक्षकों को नियमों के विरुद्ध स्थानांतरित किया गया और किस प्रकार “अतिशेष सूची” में हेरफेर कर अपनों को उपकृत किया गया।
प्रशासन भी आया हरकत में
शिकायतों के बाद जिला शिक्षा विभाग और संभाग स्तर पर जांच हुई। प्रारंभिक जांच में बीईओ जयसिंह भारद्वाज पर लगे आरोप प्रथम दृष्टया सत्य पाए गए। इसके बाद दुर्ग संभाग आयुक्त ने निलंबन की कार्यवाही की।
सूत्रों की मानें तो यह कार्रवाई किसी एक बिंदु पर नहीं, बल्कि पूरे मामले में पाई गई संवेदनहीनता, कदाचार और पक्षपातपूर्ण निर्णय पर आधारित है।
आगे भी हो सकते हैं खुलासे
शिक्षक साझा मंच का दावा है कि यदि इस प्रक्रिया में गहराई से जांच की जाए तो जिले के अन्य अधिकारियों की संलिप्तता भी उजागर हो सकती है। मंच ने मांग की है कि एक उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कमेटी गठित कर सभी युक्तियुक्तकरण आदेशों की समीक्षा की जाए।
शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने की दिशा में यह कार्रवाई एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। डौंडी बीईओ के निलंबन से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि अब अनियमितता और मनमानी पर प्रशासन सख्त रवैया अपना रहा है। इस पूरे प्रकरण में शिक्षक साझा मंच बालोद की सतत सक्रियता और तथ्यात्मक शिकायतों ने अहम भूमिका निभाई है। अब उम्मीद की जा रही है कि जिले में शिक्षा व्यवस्था को निष्पक्ष और नियमबद्ध बनाने के लिए अन्य संदिग्ध मामलों की भी गहन जांच की जाएगी।





















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