बालोद/रायपुर, विशेष रिपोर्ट – शिक्षा विभाग की लापरवाही और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी एक बार फिर सुर्खियों में है। डौंडी विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) जयसिंह भारद्वाज को युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के चलते संभागायुक्त दुर्ग द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। लेकिन इसी ब्लॉक के एक अन्य गंभीर मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है, जिससे शिक्षक राकेश सेन जैसे शिकायतकर्ताओं को न्याय का अब भी इंतजार है।
बीईओ निलंबन की वजह:
डौंडी बीईओ जयसिंह भारद्वाज पर आरोप है कि उन्होंने शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के दौरान नियमों की अनदेखी करते हुए कई शिक्षकों को अनुचित रूप से अतिशेष की श्रेणी में डाल दिया।
जांच में सामने आया कि:
रीता गरेवाल (परिवीक्षा अवधि में) को गलत तरीके से अतिशेष घोषित किया गया।
नूतन कुमार साहू, जिन्हें गणित विषय का एकमात्र शिक्षक होने के बावजूद अतिशेष माना गया।
साल्हे, धुरवाटोला और पूत्तरवाही जैसी शालाओं में भी विषयवार चयन में गंभीर त्रुटियां पाई गईं।
इन मामलों में लापरवाही और स्वेच्छाचारिता स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुई, जिस पर कार्रवाई करते हुए संभागायुक्त ने उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत निलंबित किया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय बालोद तय किया गया है।
उसी विकासखंड की एक और अनदेखी: अड़जाल शाला में विज्ञान पद पर कला विषयधारी का चयन
डौंडी ब्लॉक की शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला अड़जाल में विज्ञान विषय के अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में नियमों को ताक पर रखकर चयन किया गया।
शिक्षक राकेश सेन द्वारा की गई शिकायत के अनुसार:विज्ञान विषय के लिए स्वीकृत पदों पर कला विषय के अभ्यर्थियों को आमंत्रण भेजा गया।
डीईओ की सूची में नाम होने के बावजूद पात्र विज्ञान विषयधारी अभ्यर्थी को बुलाया नहीं गया।
डीईओ कार्यालय द्वारा 24 मार्च 2025 को जारी सूची में दमयंतीन मरकाम का नाम शामिल है, जिनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि कला विषय की है।
राकेश सेन ने इस बाबत तीन बार डीईओ, कलेक्टर और संचालक को पत्र भेजकर जांच की मांग की है, लेकिन अब तक किसी स्तर पर कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई है।
प्रशासनिक दोहरापन और अनुत्तरदायित्व
यह सवाल उठना लाजमी है कि जब युक्तियुक्तकरण में गड़बड़ी पर तत्काल कार्रवाई संभव है, तो विज्ञान विषय में चयन अनियमितता पर अब तक चुप्पी क्यों? क्या शिक्षक की योग्यता और छात्रों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़ा मुद्दा इतना महत्वहीन हो गया है?
मांग: न्याय की समानता और पारदर्शिता की बहाली
शिक्षक राकेश सेन ने मांग की है कि जिस प्रकार बीईओ पर त्वरित कार्रवाई की गई, उसी प्रकार चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाते हुए अड़जाल शाला के विवादित चयन की निष्पक्ष जांच की जाए और केवल योग्य विज्ञान विषयधारी अभ्यर्थियों को ही नियुक्त किया जाए।
डौंडी ब्लॉक में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। एक ओर अधिकारी पर कार्रवाई होती है, तो दूसरी ओर शिक्षक अब भी न्याय के लिए पत्र दर पत्र लिख रहे हैं। यह दोहरा रवैया शिक्षा तंत्र की पारदर्शिता और भरोसे पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
शिक्षक मंच की सक्रियता लाई रंग: डौंडी के BEO निलंबित, युक्तियुक्तकरण में भारी गड़बड़ी का खुलासा




















