चिंतन शिविर 2.0: आईआईएम में मंत्रियों को मिला वित्तीय प्रबंधन का नया दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित पूरी कैबिनेट ने सीखे संसाधनों के बेहतर उपयोग के उपाय
मुख्यमंत्री और पूरी कैबिनेट ने सीखे ऐसे गुर… जो बदल सकते हैं छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था!
रायपुर। क्या आपने कभी सोचा है कि राज्य के मुख्यमंत्री और उनके मंत्री अचानक क्लासरूम में क्यों बैठे? क्या वजह रही कि देश के जाने-माने अर्थशास्त्री उन्हें सार्वजनिक वित्त और पूंजीगत व्यय की बारीकियाँ समझा रहे थे? दरअसल, छत्तीसगढ़ में कुछ ऐसा हो रहा है जो आने वाले समय में विकास की दिशा ही बदल सकता है। शनिवार को आईआईएम रायपुर में आयोजित ‘चिंतन शिविर 2.0’ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित पूरी कैबिनेट ने विशेषज्ञों से सीखे आर्थिक प्रबंधन के वे सूत्र, जो राज्य को आत्मनिर्भर और तेज़ विकासशील बना सकते हैं।
दरअसल राज्य सरकार के चिंतन शिविर 2.0 के तहत शनिवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों ने आईआईएम रायपुर में वित्तीय प्रबंधन पर विशेषज्ञों से सीधा संवाद किया। पोस्ट लंच सत्र में आईआईएम अहमदाबाद के प्रतिष्ठित प्रोफेसर डॉ. रविंद्र ढोलकिया ने “सब्सिडी से सततता : विकास के लिए सार्वजनिक वित्त पर पुनर्विचार” विषय पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

डॉ. ढोलकिया ने पूंजीगत व्यय, राजस्व संग्रहण, संसाधन जुटाने की रणनीतियाँ, और सब्सिडी के प्रभाव जैसे विषयों पर गहन जानकारी दी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यदि राज्य को दीर्घकालीन विकास दर को बनाए रखना है, तो पूंजीगत निवेश में वृद्धि अपरिहार्य है।
नीतियों को आधुनिक सोच के साथ अपनाने की पहल
शिविर में मुख्यमंत्री के साथ मुख्य सचिवालय से मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के विशेष सचिव रजत बंसल, और आईआईएम रायपुर के निदेशक श्रीराम काकाणी भी शामिल हुए। इस आयोजन का उद्देश्य नीतिगत फैसलों में वित्तीय सततता को प्राथमिकता देना और सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।
प्रशासनिक प्रशिक्षण को नया आयाम




















