प्रदेश रूचि

भैंसमुड़ी रेत खदान में चाकूबाजी करने वाले दो रेत ठेकेदार गिरफ्तार, ‘प्रदेश रुचि’ की खबर के बाद पुलिस ने दिखाई तेजी – लेकिन खदान आज भी चालू!

बालोद। बालोद जिले के चर्चित भैंसमुड़ी रेत खदान में बीते गुरुवार रात हुई चाकूबाजी की सनसनीखेज वारदात में दो रेत ठेकेदारों को गिरफ्तार कर लिया गया है। थाना पुरूर पुलिस और सायबर सेल बालोद की सक्रिय कार्रवाई के चलते मुख्य आरोपी टोनी सरदार और शिवम् सिंह को शुक्रवार को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमाण्ड पर जेल भेज दिया गया।

वारदात में प्रार्थी को चाकू और लोहे की पाइप से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 351(3), 118(1), 109, और 3(5) के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के अनुसार, प्रार्थी गोपेन्द्र कुमार साहू, जो पेशे से हाईवा वाहन चालक है, गुरुवार रात करीब 11:30 बजे भैंसमुड़ी (महानदी) के पास हाईवा (CG07-CS-0102) खड़ा कर रेत लोडिंग के इंतजार में रुका था। इसी दौरान टोनी सरदार और शिवम् सिंह एक सफेद रंग की कार से वहां पहुंचे और गाली-गलौज करते हुए गाड़ी का दरवाज़ा खुलवाया।

दरवाज़ा खुलते ही टोनी सरदार ने चाकू से गोपेन्द्र पर जानलेवा हमला किया। सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं। साथ ही संजय कुमार उरांव नामक युवक पर भी चाकू से वार किया गया जिससे उसकी पीठ में चोट आई है।

घटना के बाद प्रार्थी द्वारा की गई शिकायत पर थाना पुरूर पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर सायबर सेल बालोद की मदद से दोनों आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया।

प्रदेश रुचि की खबर के बाद तेज़ हुई पुलिस कार्रवाई

इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रदेश रुचि वेब पोर्टल ने सबसे पहले खबर प्रकाशित की थी। खबर प्रकाशित होने के कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने इस पर सक्रियता दिखाते हुए पूरे मामले में तेज़ कार्रवाई की। यह साबित करता है कि मीडिया की जिम्मेदार रिपोर्टिंग किस तरह प्रशासन को जागरूक करने में अहम भूमिका निभाती है।

खनिज विभाग की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

हालांकि, भैंसमुड़ी खदान में चाकूबाजी और ठेकेदारों की गिरफ्तारी जैसी गंभीर स्थिति के बावजूद, खनिज विभाग की भूमिका एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, वारदात के अगले ही दिन खदान में रेत खनन का काम बदस्तूर जारी रहा। ऐसे में यह आश्चर्यजनक है कि जहां पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, वहीं खनिज विभाग अब तक साइट निरीक्षण, जवाबदेही या बंदी की कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया है।

इससे पहले, प्रदेश रुचि की खबर के बाद ही मर्रामखेड़ा खदान को बंद किया गया को की आज रात को फिर से प्रारंभ करने की तैयारी में जुटी हुई है वही  भैंसमुड़ी खदान में अब तक किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई है, जिससे यह संदेह गहराता जा रहा है कि विभाग कहीं न कहीं सिस्टम में फैले ‘सिंडिकेट दबाव’ के तहत काम कर रहा है?

प्रश्न अब बड़ा है…

क्या खनिज विभाग को अब भी किसी और घटना का इंतजार है?

क्या जानलेवा हमले जैसी घटनाएं भी अब खदान संचालन को नहीं रोक पातीं?

और सबसे अहम – क्या बालोद जिले में कानून से बड़ा बन चुका है रेत माफिया सिंडिकेट?

एक ओर पुलिस कार्रवाई की सराहना की जानी चाहिए, वहीं दूसरी ओर खनिज विभाग की निष्क्रियता अब सार्वजनिक चर्चा और जांच का विषय बन चुकी है। जब तक कार्रवाई समान रूप से सभी विभागों से नहीं होगी, ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।

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