रायपुर। युक्तियुक्तकरण को लेकर आज हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सख्त ऐतराज़ जताया। कोर्ट ने साफ कहा — बिना दावा-आपत्ति लिए काउंसलिंग करना नियमों के खिलाफ है।
सरकार की ओर से जब प्रक्रिया का बचाव किया गया, तो कोर्ट के दबाव में अतिरिक्त महाधिवक्ता को लिखित में अंडरटेकिंग देनी पड़ी कि अब सभी से दावा-आपत्ति ली जाएगी और उनका निराकरण करके ही अगली कार्यवाही की जाएगी।
🔹 जो शिक्षक अभी तक ज्वाइन नहीं किए हैं, वे फिलहाल रुकें और शिक्षा कार्यालय में जाकर दावा-आपत्ति दर्ज करें, उसकी पावती जरूर लें।
🔹 जिन शिक्षकों ने पहले ही ज्वाइन कर लिया है, वे भी फौरन आवेदन देकर रिसिप्ट सुरक्षित कर लें।
शिक्षकों की ओर से इस लड़ाई को मजबूत तरीके से कोर्ट में रखा गया। अधिवक्तागण देवाशीष तिवारी, गोविंद देवांगन, राजेश वर्मा और उनकी टीम ने तीखी पैरवी करते हुए पूरे मामले को विस्तार से सामने रखा।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान शिक्षक संगठनों की मौजूदगी भी दमदार रही। रविन्द्र राठौर, जितेंद्र शर्मा, विक्रम राजपूत, देवेंद्र हरमुख, राजीव नयन शुक्ला, द्वारिका भारद्वाज, शशि अग्रवाल, जितेंद्र यादव, भगवती कोसरिया और रविन्द्र बड़तिया जैसे संघर्षशील शिक्षक नेता मोर्चे पर डटे रहे।
यह फैसला सिर्फ कानूनी जीत नहीं — ये उस हर शिक्षक की आवाज़ है जो न्याय की उम्मीद लिए खड़ा रहा। अब गेंद सरकार के पाले में है — दावा-आपत्ति के बिना कोई फैसला आगे नहीं बढ़ेगा।




















