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डाकघर से निकला प्रकृति का पैग़ाम – टिकटों में बोली धरती, जल और जंगल की पीड़ा

डाक टिकटों से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश – बालोद में अनूठी पहल

बालोद, ।जब पूरी दुनिया पर्यावरण संरक्षण की बात कर रही है, तब बालोद के आईएमए अध्यक्ष और वरिष्ठ डाक टिकट संग्राहक डॉ. प्रदीप जैन ने एक अनोखे माध्यम से समाज को जागरूक करने की पहल की है। उन्होंने डाक टिकटों की प्रदर्शनी के जरिए लोगों को बताया कि कैसे छोटी-छोटी चीजें भी बड़े संदेश दे सकती हैं — बस उन्हें देखने और समझने की दृष्टि चाहिए।

इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की थीम “प्लास्टिक प्रदूषण को खत्म करना” है, और डॉ. जैन ने इस थीम को अपने डाक-प्रेम और सामाजिक सरोकार से जोड़ा। स्थानीय बालोद डाकघर में आयोजित डाक टिकट प्रदर्शनी में उन्होंने पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े विभिन्न देशों के डाक टिकटों को सजाकर रखा, जिनमें नदियों, जंगलों, जीव-जंतुओं और स्वच्छ वायु को लेकर वैश्विक चिंताओं और प्रयासों को दर्शाया गया।

डॉ. जैन ने बताया कि प्रदूषण आज न केवल वर्तमान को बीमार बना रहा है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी अंधकार में धकेल रहा है। वायु, जल और खाद्य प्रदूषण अब बीमारियों और समयपूर्व मृत्यु के तीसरे सबसे बड़े कारण बन चुके हैं।

उनका कहना है, “जब श्वास लेना ही कठिन होता जा रहा है, तब यह सोचना जरूरी है कि हम अपनी धरा के साथ क्या कर रहे हैं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पुराने वाहनों का अंधाधुंध उपयोग, औद्योगिक धुआं और प्लास्टिक का बढ़ता इस्तेमाल हमारी साँसों पर बोझ बन चुका है। समाधान के लिए उन्होंने सार्वजनिक परिवहन, हरियाली संरक्षण और प्लास्टिक से दूरी जैसे व्यवहारिक उपायों को अपनाने की अपील की।

प्रदर्शनी के साथ-साथ डॉ. जैन ने पर्यावरण पर एक प्रेरणादायक कविता के माध्यम से भी अपनी भावना साझा की:

> “धरती, नदियां, तालाब ये प्यारे,
सब के सब हैं दोस्त हमारे।
इन सबको संरक्षित रखना,
सबको है सुरक्षित रखना।
यही है अब कर्तव्य हमारा,
पेड़ बचाएं जीवन सारा।”

एक छोटी-सी प्रदर्शनी, एक बड़ा संदेश

यह पहल यह दर्शाती है कि अगर इच्छा हो, तो डाक टिकट जैसा सादा साधन भी जनजागरण का शक्तिशाली मंच बन सकता है। डॉ. जैन की यह प्रदर्शनी केवल टिकटों की नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी की एक जीवंत झलक है।

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