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“जब कलेक्टर बनीं बेटी: वृद्धाश्रम में बुजुर्गों से मिल बांटा अपनापन..खाट पर बैठकर किए बुजुर्गों से बात”

कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने वृद्धाश्रम में दिखाया अपनापन, बुजुर्गों से की आत्मीय बातचीत, व्यवस्थाओं को और बेहतर करने के दिए निर्देश

बालोद, जिला कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने बुधवार को बालोद शहर के शिकारी पारा स्थित वृद्धाश्रम ‘सुखाश्रय’ और गंभीर रूप से बीमार बुजुर्गों के देखरेख स्थल ‘प्रशामक गृह’ का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं की बारीकी से पड़ताल की।

इस अवसर पर कलेक्टर ने बुजुर्गों से सीधे संवाद कर उनके रहन-सहन, भोजन, दवाइयों, साफ-सफाई और मनोरंजन जैसी सुविधाओं की जानकारी ली। अपने आत्मीय और सरल स्वभाव से उन्होंने वृद्धजनों का दिल जीत लिया। बुजुर्गों के साथ खाट पर बैठकर हालचाल पूछने की उनकी आत्मीयता ने वहां का माहौल भावुक कर दिया।

“कलेक्टर ने दिखाया ममता भरा प्रशासनिक चेहरा”

कलेक्टर ने बुजुर्गों को फल और बिस्किट भेंट कर मानो उनके जीवन में मिठास घोल दी। उनकी मानवीय संवेदना से प्रभावित होकर सुखाश्रय की एक वृद्ध महिला,  सुखबती बाई, ने भावुक होकर उन्हें गले लगा लिया।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने भोजन, नाश्ता, पेयजल, शौचालय और शयन कक्ष जैसी मूलभूत सुविधाओं की गुणवत्ता का जायजा लिया और वहां की रसोई तक जाकर खाद्य सामग्री की जांच की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वृद्धजनों के लिए हर सुविधा सर्वोत्तम हो और किसी तरह की कमी न रहे।

कलेक्टर ने बीमार वृद्धजनों के इलाज की व्यवस्था को लेकर भी गंभीरता दिखाई और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित करने को कहा। इसके साथ ही उन्होंने समाज कल्याण विभाग को निर्देश दिया कि वृद्धजनों को ‘श्री रामलला दर्शन’ योजना के तहत तीर्थ यात्रा का लाभ दिलाया जाए और इसके लिए जिला प्रशासन हर संभव सहायता करेगा।

“कलेक्टर की आत्मीय पहल: वृद्धाश्रम में संवाद, सुधार और स्नेह”

उन्होंने जिले के वृद्धाश्रम और प्रशामक गृह को एक ही परिसर में एकीकृत कर सर्वसुविधायुक्त “कम्पोजिट भवन” निर्माण का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि एक समग्र भवन में बुजुर्गों को न सिर्फ बेहतर देखभाल मिलेगी बल्कि एक स्नेहिल वातावरण भी मिलेगा।

कलेक्टर ने इस पूरे कार्य को प्राथमिकता देने और जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही। उनके साथ अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक समेत अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

यह दौरा सिर्फ निरीक्षण नहीं था, बल्कि एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी की संवेदनशीलता और बुजुर्गों के प्रति सम्मान की जीवंत मिसाल भी था।

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